सतनाम सिंह
जिला कार्यालय के कक्ष में O.A.No.-127/15/EZ में NGT/EZ, कोलकाता के आदेश दिनांक 04.05.2022 के अनुपालनार्थ पट्टेधारियों से उनका पक्ष जानने एवं सुनवाई हेतु दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई। जिसमें सुनवाई हेतु गठित समिति के सदस्यों जिला खनन पदाधिकारी प्रदीप कुमार साह एवं IFP, रांची के वैज्ञानिक डॉ० संजीव कुमार, एस एन मिश्रा आदि ने भाग लिया। 2 दिनों की सुनवाई में कुल 172 खनन पट्टा के पट्टेधारी व उनके प्रतिनिधि उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा। आपको बता दें कि बीते वर्ष 2018 में एनजीटी के द्वारा आईसीएफआरए के अनुषांगिक इकाई इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट प्रोडक्टिविटी (आईएफपी),रांची को प्रतिनियुक्त किया गया था,और उनके द्वारा पाकुड़ एवं दुमका जिले के सभी खनन पट्टे का मापी किया गया था, और एनजीटी को एक रिपोर्ट भेजा गया था जिसमें कि 467 खनन पट्टे धारियों की खान की सर्वे हुई थी, और इसी रिपोर्ट को जब माननीय न्यायालय एनजीटी कोलकाता को सौंपा गया तब 1 जुलाई 2018 को यह आदेश पारित किया गया की जो भी अवैध इकाइयां हैं उन्हें चिन्हित कर पर्यावरण क्षति के विरुद्ध उन सभी अवैध इकाइयों से वसूली करेंगे, राज्य स्तर पर बैठक हुई जिसमें 24 सितंबर 2020 को हुई जो मुख्य सचिव सुखदेव सिंह की अध्यक्षता में हुई थी, और उन्होंने पाकुड़ जिला एवं दुमका जिला के डीएमओ को यह आदेश दिया कि वह वैसे इकाइयों को चिन्हित करेंगे जो अवैध चल रहे हैं,जिसके परिपेक्ष में सभी खनन पट्टेधारियों से करीब 1156 करोड़ मांग की गई थी। जिस पर कुछ पट्टेधारियों ने माननीय न्यालय एनजीटी,कोलकाता में याचिका दायर किया न्यायालय ने मांग को खारिज कर दिया। और पुनः आईसीएफआरई के रिपोर्ट को जांच करने का निर्देश दिया। चुकी एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) का कार्य पर्यावरण की रक्षा करना है और झारखंड मिनिरल माइन्स एक्ट पर्यावरण से हटकर अवैध खनन को लेकर कार्य करती है लेकिन इस मामले को जब एनजीटी द्वारा खारिज कर दिया गया उसके बाद पाकुड़ डीएमओ कार्यालय द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई जिसके विषय में माननीय न्यायालय एनजीटी की बात कही गई लेकिन रॉयल्टी की मांग की गई या फिर खनिज की दाम मांगी गई। जिस पर फिर से सभी खनन पट्टे धारियों ने आवाज उठाई और इसी के आलोक में दो दिवसीय सुनवाई रखी गई थी।




