बिक्की सन्याल
पाकुड़। अमड़ापाड़ा प्रखंड क्षेत्र के सीमावर्ती गांव बासमती में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं श्रीधाम वृंदावन से आए कथा वाचक संत भागवत शरण महाराज के द्वारा भागवत कथा का समापन करते हुए कई कथा प्रसंगों का भक्तों को श्रवण कराया गया। उन्होंने सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों को श्रीकृष्ण और सुदाम की दोस्ती की मिसाल पेश की गई और समाज को समानता का संदेश दिया गया। वहीं सुदामा चरित्र को विस्तार से सुनाते हुए श्रीकृष्ण सुदामा की निश्छल मित्रता का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे बिना याचना के श्री कृष्ण ने गरीब सुदामा की स्थिति को सुधारा। वहीं अंतिम में कथावाचक के द्वारा श्रीराम द्वारा भगवान शिव का धनुष तोड़ने और श्रीराम-सीता विवाह का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि राजा जनक अपने दरबार में पुत्री सीता के स्वयंवर का आयोजन करते हैं। वह शर्त रखते हैं कि जो भी योद्धा भगवान शिव के धनुष को भंग करेगा, उससे सीता का विवाह करवाया जाएगा। विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण भी स्वयंवर में पहुंचे। लंकापति रावण भी धनुष यज्ञ में शामिल हुए, लेकिन आकाशवाणी होने के कारण उन्हें लंका लौटना पड़ा। गुरु की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने धनुष को भंग कर दिया। कथा के दौरान भगवान राम, माता सीता, रावण सहित कई झांकियां भी पेश की गई। वही कथा पूरी होने के बाद सभी भक्तों को भंडारा खिलाया गया। वही आज मंगलवार सुबह 9 बजे हवन कुंड का कार्यक्रम किया गया। और 12 बजे महाप्रसाद वितरण कर सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन किया गया। मौके पर जजमान अमूल्य मंडल एवं पत्नी, मुकेश मंडल, लोखाय पाल, संटू मंडल, जीतन मंडल, ललन भगत, मुकेश मंडल, लोखय पडाल, ब्रजेश भगत, अमर भगत, सुधांशू मंडल,हिमांशु मंडल सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।







