रांची/पाकुड़। झारखंड विधानसभा के सत्र में ग्रामीण सड़कों से जुड़े टेंडरों को लेकर सरकार और विभागीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए। लिट्टीपाड़ा के विधायक हेमलाल मुर्मू ने सदन में कहा कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के नियमों के अनुसार किसी भी निविदा का निष्पादन 180 दिनों के भीतर होना चाहिए, लेकिन व्यवहार में इसका पालन नहीं हो रहा है। विधायक ने बताया कि 8 दिसंबर को विभागीय मंत्री द्वारा ग्रामीण सड़कों से संबंधित टेंडरों को रद्द करने का निर्देश पत्र के माध्यम से दिया गया था। इसके बावजूद संबंधित निविदाएं निरस्त नहीं हुईं। 26 दिसंबर 2025 को प्रकाशित खबरों में भी इस विषय का उल्लेख हुआ, लेकिन विभागीय स्तर पर अब तक कोई स्पष्ट और ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।।हेमलाल मुर्मू ने सवाल उठाया कि जब मंत्री रद्द करने का निर्देश दे चुके हैं, तो उसके बाद भी टेंडर क्यों जारी रहे। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं में तकनीकी (Technical Bid) और वित्तीय (Financial Bid) दोनों बिड खोली जा चुकी हैं। ऐसी स्थिति में क्या टेंडर कमेटी और सक्षम प्राधिकार मंत्री के आदेश को लागू करने के लिए बाध्य नहीं हैं? विधायक ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री नीतिगत निर्णय लेते हैं, विभागीय सचिव उन्हें विधिक रूप देते हैं, टेंडर कमेटी मूल्यांकन कर अनुशंसा करती है और सक्षम प्राधिकार अंतिम निर्णय लेता है। ऐसे में सबसे प्रभावी अधिकार किसके पास है—मंत्री, टेंडर कमेटी या सक्षम प्राधिकार? उन्होंने यह भी कहा कि यदि 180 दिनों की समयसीमा पूरी हो जाती है, तो नियमों के तहत या तो निविदादाताओं से लिखित सहमति लेकर वैधता बढ़ाई जानी चाहिए या फिर निविदा स्वतः निरस्त मानी जानी चाहिए। लेकिन 2024-25 की कई निविदाएं सरकार के आदेश के बावजूद लंबित हैं, जो प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं। सदन में विधायक ने सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की कि मंत्री के पत्र का विधिक प्रभाव क्या है, लंबित टेंडरों पर आगे क्या कार्रवाई होगी और टेक्निकल व फाइनेंशियल बिड खुलने के बाद टेंडर रद्द करने की स्पष्ट प्रक्रिया क्या है।
सरकार के जवाब पर अब सबकी नजर है। क्या 180 दिन के नियम का सख्ती से पालन होगा? क्या लंबित निविदाओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा? और क्या मंत्री के निर्देशों को विधिवत लागू किया जाएगा? विधानसभा में उठे इस सवाल ने शासन-प्रक्रिया और विभागीय समन्वय दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।





