पाकुड़: मानदेय भुगतान लंबित रहने सहित विभिन्न मांगों को लेकर पाकुड़ जिले के लगभग 250 मनरेगा कर्मचारी गुरुवार से समाहरणालय के बाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। इससे जिले में चल रही कई योजनाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। बताया जाता है कि बुधवार तक राज्यस्तरीय तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल समाप्त हुई थी, लेकिन इस दौरान राज्य सरकार की ओर से मनरेगा कर्मियों के साथ किसी प्रकार की सकारात्मक वार्ता नहीं की गई। इसी के विरोध में जिले के कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया। मनरेगा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अजित टुडू ने कहा कि प्रदेश इकाई के निर्देशानुसार जिले के सभी मनरेगा कर्मचारी गुरुवार से हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न योजनाओं पर असर पड़ेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती है, लेकिन विडंबना यह है कि इस योजना को संचालित करने वाले कर्मचारियों के लिए ही कोई सुरक्षा या गारंटी नहीं है। कार्य के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती, जिससे कर्मियों में असंतोष बढ़ रहा है।
वहीं कर्मचारी अजय कुमार साह ने आरोप लगाया कि राज्य के कई जिलों में महीनों से मनरेगा कर्मियों का मानदेय लंबित है, जबकि कुछ जगहों पर लगभग एक वर्ष से भुगतान नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में कर्मियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और अन्य जरूरी खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।कर्मचारियों का कहना है कि विभागीय कार्यों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे कई कर्मी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है। हड़ताल के कारण जिले में डोभा निर्माण, तालाब निर्माण, सिंचाई से जुड़ी योजनाएं, बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत फलदार पौधरोपण, मेढ़ बंदीकरण, दीदी बाड़ी योजना, प्रधानमंत्री आवास एवं अबुआ आवास निर्माण जैसी कई योजनाओं पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
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