राजकुमार भगत
पाकुड़। ओपेन स्काई स्मार्ट स्कूल, पाकुड़ में 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की 127 वीं जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया। सभी शिक्षकों ने नेताजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। फिर बच्चों के बीच नेताजी के जीवनी पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने अपने संबोधन में नेताजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 में हुआ था। सुभाष चंद्र बोस के पिता कटक में एक सफल वकील थे और उन्हें “राय बहादुर” की उपाधि प्राप्त थी। नेता जी ने अपने सभी भाई-बहनों की तरह अपनी स्कूली शिक्षा कटक के प्रोटेस्टेंट यूरोपियन स्कूल जोकि अब स्टीवर्ट हाई स्कूल के नाम से जाना जाता है। सुभाष चंद्र बोस 16 वर्ष की आयु से ही स्वामी विवेकानन्द और रामकृष्ण की रचनाएँ पढ़ते थे, जिससे वे उनकी शिक्षाओं से बहुत प्रभावित हुए थे।
सन 1920 में नेता जी ने सिविल सेवा की परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया था। लेकिन जैसे ही एक साल बाद अप्रैल 1921 में भारत में राष्ट्रवादी उथल-पुथल के बारे में सुनना, उन्होंने अपनी उम्मीदवारी से इस्तीफा दे दिया और अपने देश भारत वापस आ गये और वे असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए जिसकी शुरुआत महात्मा गांधी ने की थी। आंदोलन के समय गांधी जी ने उनको चितरंजन दास के साथ काम करने की सलाह दी, चितरंजन दास सुभाष चंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कहलाते हैं। उनके प्रसिद्ध नारों में से एक है ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’, ‘जय हिंद’ और ‘दिल्ली चलो’। उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई योगदान दिये। नेताजी का निधन विमान दुर्घटना में हो गया था।पराक्रम दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में निदेशक मनोज भगत, रंजन कुमार, निहारिका देवी, प्राणु प्रधान , शुभांकर मल्लिक, ज्योति बास्की , देवाशीष रॉय, मीरू मरांडी, कल्याणी देवी , धर्मेंद्र मुर्मू आदि शिक्षक शिक्षिकाओं सहित सभी शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने अपना योगदान दिया।






