राजकुमार भगत
पाकुड़। नई समाज उत्थान समिति पाकुड़ द्वारा जननायक कर्पूरी ठाकुर का 100वां जयंती छोटी अलीगंज पाकुड़ में उनके चित्र पर पुष्पांजलि दीप प्रज्वलित कर मनाई गई। इस अवसर पर नई समाज उत्थान समिति के जिला सचिव मनोज ठाकुर ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कर्पूरी ठाकुर जी का जन्म 24 जनवरी 1924 में बिहार के समस्तीपुर जिले के पितौंझिया नामक ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम गोकुल ठाकुर और माता का नाम रामदुलारी देवी था।
कर्पूरी ठाकुर की भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का देश में अहम योगदान रहा है। गरीबों की मसीहा के रूप में हुए देश-विदेश में विख्यात हुए हैं। नाई समाज उत्थान समिति के जिला सचिव श्री मनोज ठाकुर, कोषाध्यक्ष सदानंद ठाकुर, रवि ठाकुर, सचिन ठाकुर, संजय ठाकुर, विजय भंडारी एवं अन्य लोगों ने भी पुष्प अर्पित किए।, जन्म शताब्दी के मौके पर राष्ट्रपति भवन की ओर से भारत रत्न देने का इसका ऐलान किया है।इसके लिए नाई समाज उत्थान समिति पाकुड़ केंद्र सरकार को बधाई दी है। उत्थान समिति ने पाकुड़ प्रशासन से शहर में एक भव्य मूर्ति का निर्माण करने की मांग रखेंगे। नई समाज उत्थान समिति के जिला अध्यक्ष देवकांत ठाकुर ने बताया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर एक स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक और राजनेता के रूप में जाने जाते थे। बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री और फिर दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर ने राजनीतिक जीवन में अपने सिद्धांतों को नहीं छोड़ा।कर्पूरी ठाकुर भारत छोड़ो आन्दोलन में कूद पड़े। उन्हें 26 महीने तक जेल में रहना पड़ा.। उन्होंने 22 दिसंबर 1970 से 2 जून 1971 तक और 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 1979 तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। कर्पूरी ठाकुर जैसा समाजवादी विचारधारा पर जीने वाले व्यक्ति अब बहुत कम ही देखने को मिलते हैं । भारत में इन्हें जननायक की उपाधि प्राप्त है, श्री ठाकुर ने कहा कि सामाजिक न्याय के प्रकाश स्तंभ, दलित, वंचित, उपेक्षित के बीच भारत रत्न मिलने से जरुर साकारात्मक भाव पैदा करेगा।







