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September 21, 2026 10:43 pm

बैसाखी की धूम: गुरुद्वारों में विशेष पाठ और लंगर का आयोजन, सिख समुदाय ने नई आशाओं और संकल्पों के साथ मनाया बैसाखी का त्यौहार।

सतनाम सिंह

बैसाखी का पावन त्योहार सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो सिख नव वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन को सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में देखा जाता है, क्योंकि 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। बैसाखी को फसल कटाई के त्योहार के रूप में भी मनाया जाता है, जो किसानों की खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक है। इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष प्रार्थनाएं, पाठ और कीर्तन आयोजित किए जाते हैं, और लंगर का आयोजन किया जाता है। लोग पारंपरिक नृत्य और संगीत का आनंद लेते हैं, और इस पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। बैसाखी सिख समुदाय की एकता और समृद्धि का प्रतीक है, और यह त्योहार नई आशाओं और संकल्पों का प्रतीक है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष,सचिव और सदस्य ने बताया कि बैसाखी का त्यौहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया एवं लंगर का प्रसाद का वितरण कर समाप्ति की गई, पंजाबी समाज एवं सिंधी समाज एवं पाकुड़ नगर के गणमान्य लोग गुरु के पाठ एवं लंगर में शामिल हुए गुरु घर से आशीर्वाद लिया। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी में प्रधान रंजू सिंह,कुलदीप सिंह,रवींद्र सिंह,रोमी सिंह,गुरु घर के ग्रंथि,भाई प्रेम सिंह,पूनम कौर,मनजीत कौर,कुलबीर कौर,सिम्मी कौर,गगन सिंह एवं सदस्य गण के साथ हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए होकर गुरु से आशीर्वाद प्राप्त कर किया और कुशल मंगल की प्रार्थना की।

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