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May 1, 2026 4:01 am

खेती से आत्मनिर्भर बना राजीबुल, अब नहीं करना पड़ता पलायन, आम और सब्जी की खेती से सालाना लाख की कमाई

डीसी ने खेत में खाया आम, कहा – ऐसे किसानों को सरकार दे रही है पूरा सहयोग

पाकुड़: कभी मजदूरी करने वाले राजीबुल शेख आज बागवानी से आत्मनिर्भर बन चुके हैं। मनरेगा के तहत संचालित बिरसा हरित ग्राम योजना ने न सिर्फ उनकी जिंदगी बदली, बल्कि गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा भी बन गई।गुरुवार को उपायुक्त मनीष कुमार ने पाकुड़ प्रखंड के हिरानंदनपुर पंचायत अंतर्गत बेलडंगा गांव में राजीबुल के बगीचे का निरीक्षण किया। राजीबुल ने बताया कि उन्होंने 1 एकड़ भूमि में 112 आम के पेड़ और 80 इमारती पौधों के साथ नींबू, पपीता, कटहल और सब्जियों की खेती की है।

इस बार आमदनी लाख के पार

राजीबुल ने बताया कि 2024 में आम की बिक्री से 26 हजार और सब्जियों से 16 हजार रुपये की कमाई हुई, जबकि इस बार उनकी कुल आमदनी एक लाख रुपये से ऊपर पहुंच गई है। खेत में ही उन्होंने उपायुक्त को खुद के उगाए आम भी खिलाए। उपायुक्त ने आम का स्वाद लेकर राजीबुल के काम की जमकर सराहना की।

“हर योग्य किसान जुड़ें इस योजना से” —डीसी

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कहा, “बिरसा हरित ग्राम योजना से ग्रामीण किसान अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं। यह साधारण खेती का बेहतर विकल्प है। सरकार इसे बढ़ावा दे रही है, सभी लाभुक इसका लाभ लें।निरीक्षण के समय विशेष कार्य पदाधिकारी त्रिभुवन कुमार सिंह, प्रखंड विकास पदाधिकारी समीर अल्फ्रेड मुर्मू, और परियोजना पदाधिकारी मोतिउर रहमान भी मौजूद रहे। सभी ने बागवानी की प्रगति को सराहा और राजीबुल को प्रोत्साहित किया।

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