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January 27, 2026 4:29 am

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पचुवाड़ा कोल माइंस विवाद सुलझा, विस्थापितों की मांगों पर बनी समिति।

विस्थापितों की जीत: समिति गठन पर सहमति, पचुवाड़ा माइंस में फिर गूंजेगी खनन की आवाज।

पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा स्थित पचुवाड़ा कोल माइंस से कोयला खनन और परिवहन कार्य एक बार फिर शुरू होने की राह पर है। विस्थापित ग्रामीणों की मांगों को लेकर बीते कुछ दिनों से ठप पड़ी खनन गतिविधियों को लेकर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिला प्रशासन, कोल कंपनी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच आपसी सहमति बन गई। यह वार्ता विशुनपुर स्थित आर एंड आर कॉलोनी के कम्युनिटी हॉल में संपन्न हुई। बैठक में अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, एसडीओ साइमन मरांडी, महेशपुर एसडीपीओ विजय कुमार, जिला खनन पदाधिकारी, अमड़ापाड़ा सीओ औसफ़ अहमद, थाना प्रभारी अनूप रौशन भेंगरा, डब्ल्यूपीडीसीएल के जीएम रामाशीष चटर्जी, बीजीआर कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनिल रेड्डी, शिवचंद्रा, महेश कुमार समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे। गौरतलब है कि विस्थापित ग्रामीण बीते रविवार से मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर कोल माइंस से कोयले का उत्खनन और परिवहन रोक रखे थे। ग्रामीणों की मुख्य मांगों में स्थानीय स्कूल की सुविधा, कृषि क्षतिपूर्ति, तथा उत्खनन के बाद की गई जमीन का समतलीकरण शामिल था, ताकि उसे दोबारा खेती योग्य बनाया जा सके। बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 15 जुलाई 2025 को एक समर्पित समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें जिला प्रशासन, कोल कंपनी के प्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल होंगे। यह समिति विस्थापितों की मांगों पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। विशेष रूप से वर्ष 2012 में एमटा कोल कंपनी और ग्रामीणों के बीच हुए समझौते को आधार मानते हुए समस्याओं का समाधान किया जाएगा। साथ ही यह भी तय हुआ कि गठित समिति की बैठक प्रत्येक माह आयोजित की जाएगी, ताकि ग्रामीण अपनी समस्याओं और सुझावों को नियमित रूप से रख सकें और समाधान की दिशा में निरंतर प्रगति हो सके। ग्रामीण सुरेश टूडू, आंद्रियास मरांडी, रमेश और रंजन मरांडी ने कंपनी से आग्रह किया कि वे जल्द से जल्द क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं बहाल करें ताकि खनन कार्य के साथ-साथ क्षेत्र का समग्र विकास भी सुनिश्चित हो सके।

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