ठंड से बचाव को लेकर जिप अध्यक्ष ने बुजुर्गों को दी स्वास्थ्य संबंधी सलाह
पाकुड़: जब दिसंबर की ठिठुरन हड्डियों तक उतर रही हो और पहाड़ी इलाकों में ठंड का प्रकोप सबसे ज्यादा महसूस हो, ऐसे वक्त में अगर किसी के कंधों पर कंबल पड़े तो वह सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि भरोसे और संवेदना की चादर होती है। कुछ ऐसा ही दृश्य आज 31 दिसंबर 2025 को पाकुड़िया प्रखंड के सुदूर गांवों में देखने को मिला, जहां जिला परिषद अध्यक्ष जूली हेंब्रम ने असहाय और बुजुर्गों के बीच कंबल वितरण कर मानवीय सरोकार का उदाहरण पेश किया।लागदुम पंचायत के चिरुडीह, बरमसिया और लागदुम गांव हों या फिर माहौल पहाड़ी पंचायत के बालीडीह और तिलबरिया—हर जगह ठंड से कांपते बुजुर्गों के चेहरों पर राहत की मुस्कान साफ झलक रही थी। बासितकुंडी पंचायत के लखीपोखर गांव में भी जरूरतमंद बुजुर्गों को कंबल देकर ठंड से लड़ने का संबल दिया गया।कार्यक्रम के दौरान जिला परिषद अध्यक्ष ने बुजुर्गों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें ठंड के मौसम में अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने, गर्म पानी पीने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी। यह सलाह किसी औपचारिक भाषण की तरह नहीं, बल्कि अपनेपन और अनुभव से उपजी चेतावनी जैसी थी।कंबल वितरण कार्यक्रम में लखीपोखर के प्रधान मनोज हेंब्रम, वार्ड सदस्य रेणुका मरांडी, रविन्द्र मरांडी, जियोन मरांडी, सुशील मुर्मू सहित अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति ने इसे सामूहिक संवेदना का रूप दिया।साल के आखिरी दिन हुए इस आयोजन ने केवल ठंड से राहत ही नहीं दी, बल्कि 2025 को विदा और 2026 के स्वागत का मानवीय संदेश भी दिया। जूली हेंब्रम ने ग्रामीणों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज का असली विकास तभी संभव है, जब अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचे।कह सकते हैं कि इस कड़ाके की ठंड में कंबलों के साथ जो सबसे बड़ी सौगात मिली, वह थी—इंसानियत की गरमाहट।










