पाकुड़। व्यवहार न्यायालय स्थित कुटुंब न्यायालय में चल रहे मूल भरण-पोषण वाद संख्या 288/2025 (संतोषी कुनाई बनाम भीम कुनाई) का सुखद अंत हो गया। वर्षों से आपसी मतभेद के कारण अलग रह रहे पति-पत्नी को प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के अथक प्रयास से फिर से एक साथ रहने के लिए राजी किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को समझाइश देते हुए परिवार और बच्चे के भविष्य को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। न्यायालय की सकारात्मक पहल और सतत काउंसलिंग के बाद दोनों पति-पत्नी ने पुराने मतभेद भुलाकर साथ रहने की सहमति जताई। दंपति के बीच सुलह होने से न केवल एक परिवार फिर से जुड़ गया, बल्कि उनके बच्चे के भविष्य को भी नई दिशा मिली। प्रधान न्यायाधीश ने दोनों को आपसी समझ, संयम और पारिवारिक सहयोग के साथ सुखपूर्वक जीवन बिताने की सलाह दी। इस अवसर पर दोनों पक्षों के परिजन और अधिवक्ता मौजूद रहे। कुटुंब न्यायालय की इस पहल से एक बार फिर यह संदेश गया कि संवाद और समझ से टूटते रिश्तों को जोड़ा जा सकता है।








