पाकुड़। सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में नसीपुर मल्टीपरपज को-ऑपरेटिव सोसायटी (MPCS) पाकुड़ जिले में एक सफल मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है। वर्ष 2023 में गठित यह समिति आज 251 सदस्यों के साथ स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से रोजगार और आय के नए अवसर सृजित कर रही है। नसीपुर MPCS का पंजीकरण 31 अक्टूबर 2023 को हुआ था। समिति की अध्यक्ष चंचला रविदास और सदस्य सचिव अमीर हामजा के नेतृत्व में समिति अपने सदस्यों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है।
वन क्षेत्र में तकनीक से बढ़ी आमदनी
समिति को राज्यस्तरीय सहकारी संस्था झामकोफेड से जोड़ा गया है। वन क्षेत्र में कार्यरत होने के कारण झामकोफेड द्वारा 25 आधुनिक टूल किट उपलब्ध कराई गई हैं। इनकी मदद से आम, इमली, नारियल समेत अन्य लघु वनोत्पादों का सुरक्षित और व्यवस्थित संग्रह संभव हो सका है। इससे वनोत्पाद अब केवल संग्रह तक सीमित न रहकर व्यावसायिक गतिविधि का रूप ले रहे हैं।
सरसों तेल उत्पादन से मिलेगा स्थानीय रोजगार
झामकोफेड की ओर से समिति को 10 लाख रुपए की लागत से भवन और 35 लाख रुपए की सरसों तेल उत्पादन मशीन उपलब्ध कराई जा रही है। मशीन स्थापित होने के बाद सरसों तेल का उत्पादन शुरू होगा, जिससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, बल्कि समिति अपने ब्रांड नाम से शुद्ध सरसों तेल बाजार में उपलब्ध करा सकेगी।
आटा और मैदा उत्पादन की भी तैयारी
समिति भविष्य में आटा और मैदा उत्पादन शुरू करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य सदस्यों को बाजार पर निर्भरता से मुक्त कर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराना है।
सहकारिता से बन रहे आजीविका के स्थायी साधन
जिला सहकारिता पदाधिकारी चंद्रजीत खलखो ने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। नसीपुर MPCS जैसी समितियाँ स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही हैं। भविष्य में भी ऐसी समितियों को हरसंभव तकनीकी और संस्थागत सहयोग दिया जाएगा।
पूरे क्षेत्र के लिए लाभकारी मॉडल
नसीपुर MPCS स्थानीय उत्पादन, संग्रह और प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर न सिर्फ अपने सदस्यों बल्कि पूरे क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।









