यासिर अराफात
पाकुड़ | रक्तदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को गलत बताते हुए पाकुड़ के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. मनीष कुमार ने लोगों से आगे बढ़कर नियमित रक्तदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रक्तदान न तो सेहत बिगाड़ता है और न ही शरीर को कमजोर करता है, बल्कि यह शरीर के लिए फायदेमंद होता है और जरूरतमंदों के लिए जीवनदायी साबित होता है। डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि वैज्ञानिक रूप से यह पूरी तरह प्रमाणित है कि तय अंतराल पर किया गया रक्तदान सुरक्षित है। एक बार में लिया जाने वाला 350 से 450 मिलीलीटर रक्त शरीर कुछ ही दिनों में दोबारा बना लेता है। इससे शरीर में नए और स्वस्थ रक्त कणों का निर्माण होता है, जिससे व्यक्ति खुद को अधिक चुस्त और ऊर्जावान महसूस करता है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग चक्कर आने या कमजोरी के डर से रक्तदान से बचते हैं, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। यदि कोई व्यक्ति स्वस्थ है और चिकित्सकीय मानकों के अनुसार रक्तदान करता है तो उससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। रक्तदान के बाद थोड़ा आराम, पर्याप्त पानी और सामान्य भोजन लेने से व्यक्ति जल्द ही अपनी दिनचर्या में लौट सकता है।
डॉ. मनीष कुमार के अनुसार नियमित रक्तदान से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों की आशंका कम होती है। रक्तदान के बाद बोन मैरो सक्रिय होकर नया रक्त बनाता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है। साथ ही रक्तदान से पहले की जाने वाली जांच के दौरान कई बार उच्च रक्तचाप, कम हीमोग्लोबिन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान हो जाती है। उन्होंने बताया कि स्वस्थ पुरुष हर तीन महीने में और स्वस्थ महिलाएं हर चार महीने में रक्तदान कर सकती हैं। 18 से 60 वर्ष की आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वजन कम से कम 45 किलोग्राम हो और हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे अधिक हो, सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है।
डॉ. मनीष कुमार ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि रक्त का कोई विकल्प नहीं है। यह किसी मशीन या फैक्ट्री में नहीं बनता, बल्कि केवल इंसान ही इंसान की जान बचा सकता है। उन्होंने कहा कि आज यदि हम स्वस्थ हैं तो यह जरूरी नहीं कि कल भी हमें या हमारे परिवार को रक्त की जरूरत न पड़े। इसलिए रक्तदान को डर की नजर से नहीं, बल्कि गर्व और सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।







