राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर पाकुड़ के पुराने सदर अस्पताल परिसर में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत पोषण किट वितरण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रोजेक्ट जागृति के अंतर्गत राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम का हिस्सा था।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मनीष कुमार, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. मनीष कुमार, जिला बीवीडी पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार और रेड क्रॉस सचिव डॉ. कुणाल कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय युवा दिवस युवाओं को आत्मबल, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” आज भी हर चुनौती से लड़ने की ताकत देता है। उपायुक्त ने टीबी को लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। नियमित दवा सेवन, पौष्टिक आहार और चिकित्सकीय सलाह का पालन कर टीबी को पूरी तरह हराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से टीबी मरीजों को इलाज के दौरान छह माह तक प्रतिमाह ₹1000 की पोषण सहायता दी जा रही है, ताकि मरीजों को पोषण की कमी न हो। इस राशि का सही उपयोग करना मरीज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि टीबी के इलाज के साथ-साथ इसके फैलाव को रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। विशेष रूप से बच्चों को टीबी सहित अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाना जरूरी है। साफ-सफाई, सतर्कता और समय पर जांच से गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। उपायुक्त ने टीबी से पूरी तरह स्वस्थ हो चुके लोगों से “टीबी चैंपियन” बनकर समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की, ताकि भय या लापरवाही के कारण कोई इलाज से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 513 टीबी मरीजों को गोद लिया जा चुका है, जिनमें से 51 मरीजों को स्वयं उपायुक्त ने गोद लिया है। कार्यक्रम के दौरान मरीजों को पांचवें माह का पोषण किट भी प्रदान किया गया।








