पुण्यतिथि पर विशेष रिपोर्ट
15 जनवरी 2026 को उनकी 22 वीं पुण्यतिथि भंडारों में सादगीपूर्ण मनाई जाएगी
कोडरमा लोकसभा में रीतलाल वर्मा ने डाली थी भाजपा की मजबूत नींव,पांच बार सांसद चुने गए थे ।
सुधीर सिन्हा
जमुआ,गिरिडीह। आगामी 15 जनवरी 2026 को कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद गरीबों ,मजदूरों, किसानो, शोषितों, पीड़ितों के मसीहा जननायक रीतलाल प्रसाद वर्मा जी की 22वीं पुण्यतिथि भंडारों स्थित उनके समाधि स्थल पर सादगी पूर्ण तरीके से मनाई जाएगी।कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से सर्वाधिक पांच बार प्रतिनिधित्व करने वाले दिवंगत रीतलाल प्रसाद वर्मा जिन्होंने वकालत छोड़ कर गरीब-गुरबों तथा क्षेत्र के विकास के लिए राजनीतिक क्षेत्र को अपनाया। पूर्ववर्ती हजारीबाग जिला के समय क्षेत्र के पिछड़ा होना की कशक उन्हें झकझोर रहा था। उन्होंने राजनीति की राह पकड़ी और क्षेत्र के विकास को ही मकसद बनाया और 1972 में जमुआ विधानसभा से राजनीति शुरूआत की और कोडरमा संसदीय क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व करने का गौरव हासिल किया। बताते चलें कि तत्कालीन हजारीबाग जिला वर्तमान में गिरिडीह जिला के जमुआ प्रखंड के भंडारो गांव में 1 फरवरी, 1938 को साधारण किसान परिवार में जन्मे रीतलाल प्रसाद वर्मा ने रांची विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई पूरी कर वकालत का पेशा अपनाया। समाज की कुरीतियों तथा गरीबों की दुर्दशा को भांप उन्होंने राजनीति को कैरियर बनाया। वकालत जैसे पेशे को छोड़ कर 1970 में वे भारतीय जनसंघ से राजनीतिक सफर की शुरूआत की। 1972 के विस चुनाव में वर्मा ने जनसंघ के टिकट से चुनाव लड़ा और जमुआ विधानसभा क्षेत्र पर तत्कालीन श्रम मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानन्द प्रसाद सिन्हा को पराजित कर राजनीतिक जीवन की शुरूआत की। बताया जाता है कि भाजपा में कुछ लोगों ने राजनीतिक द्वेष की भावना से वर्मा को अलग-थलग करने का प्रयास किया जिसे देख सन् 2,000 में अलग झारखंड राज्य बनने के बाद उपेक्षित महसूस कर रहे वर्मा ने जीवन के अंतिम पड़ाव में भाजपा को ही अलविदा कह दिया। अलग झारखंड के लिए हुए आंदोलन में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी। भाजपा छोड़ने के बाद पिछड़ा चेतना मंच का गठन कर उन्होंने राजनीति सक्रियता बरकरार रखी। बाद में वे झामुमो में भी शामिल होकर इस क्षेत्र के विकास के लिए अहम योगदान दिए और अंतिम समय में भी देश के विकास के लिए काम करते रहे। वर्मा ने सन् 2002 में सिंगापुर जाकर ई-रिक्शा कम्पनी को प्लांट लगाने का न्योता दिया था। और देश के दो क्षेत्रों में से गुजरात के अहमदाबाद और झारखंड के कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के रेम्बा का चयन किया था।
काेडरमा-गिरिडीह रेलखंड में महत्वपूर्ण योगदान
लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर विधानसभा से इस्तीफा देने वाले रीतलाल प्रसाद वर्मा पूरे देश के इकलौते विधायक थे। 1977 में जनता दल ने उन्हें जनसंघ कोटे से उम्मीदवार बनाया और वे कोडरमा सीट पर कब्जा जमाने में सफल रहे। स्वर्गीय वर्मा न सिर्फ सांसद के रूप में कोडरमा का प्रतिनिधित्व किया बल्कि पूर्व में जनसंघ और बाद में भाजपा के लिए इस क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक जमीन भी तैयार किए जिसका लाभ आज भी भाजपा को मिलते आ रहा है। संसदीय कार्यकाल में उन्होंने इस क्षेत्र में विकास के कई उल्लेखनीय कार्य किए जिसमें वनांचल के नाम से वर्तमान झारखण्ड की मांग की नींव रखी। कोडरमा- गिरिडीह रेलखंड के अलावा पूरे देश में चलने वाले ई-रिक्शा उन्हीं के प्रयासों का फलाफल है।
- कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से सर्वाधिक पांच बार प्रतिनिधित्व करने वाले दिवंगत रीतलाल प्रसाद वर्मा जिन्होंने वकालत छोड़ कर गरीब-गुरबों तथा क्षेत्र के विकास के लिए राजनीतिक क्षेत्र को अपनाया। पूर्ववर्ती हजारीबाग जिला के समय क्षेत्र के पिछड़ा होना की कशक उन्हें झकझोर रहा था। उन्होंने राजनीति की राह पकड़ी और क्षेत्र के विकास को ही मकसद बनाया और 1972 में जमुआ विधानसभा से राजनीति शुरूआत की और कोडरमा संसदीय क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व करने का गौरव हासिल किया। बताते चलें कि तत्कालीन हजारीबाग जिला वर्तमान में गिरिडीह जिला के जमुआ प्रखंड के भंडारो गांव में 1 फरवरी, 1938 को साधारण किसान परिवार में जन्मे रीतलाल प्रसाद वर्मा ने रांची विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई पूरी कर वकालत का पेशा अपनाया। समाज की कुरीतियों तथा गरीबों की दुर्दशा को भांप उन्होंने राजनीति को कैरियर बनाया। वकालत जैसे पेशे को छोड़ कर 1970 में वे भारतीय जनसंघ से राजनीतिक सफर की शुरूआत की। 1972 के विस चुनाव में वर्मा ने जनसंघ के टिकट से चुनाव लड़ा और जमुआ विधानसभा क्षेत्र पर तत्कालीन श्रम मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानन्द प्रसाद सिन्हा को पराजित कर राजनीतिक जीवन की शुरूआत की। बताया जाता है कि भाजपा में कुछ लोगों ने राजनीतिक द्वेष की भावना से वर्मा को अलग-थलग करने का प्रयास किया जिसे देख सन् 2,000 में अलग झारखंड राज्य बनने के बाद उपेक्षित महसूस कर रहे वर्मा ने जीवन के अंतिम पड़ाव में भाजपा को ही अलविदा कह दिया। अलग झारखंड के लिए हुए आंदोलन में उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी। भाजपा छोड़ने के बाद पिछड़ा चेतना मंच का गठन कर उन्होंने राजनीति सक्रियता बरकरार रखी। बाद में वे झामुमो में भी शामिल होकर इस क्षेत्र के विकास के लिए अहम योगदान दिए और अंतिम समय में भी देश के विकास के लिए काम करते रहे। वर्मा ने सन् 2002 में सिंगापुर जाकर ई-रिक्शा कम्पनी को प्लांट लगाने का न्योता दिया था। और देश के दो क्षेत्रों में से गुजरात के अहमदाबाद और झारखंड के कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के रेम्बा का चयन किया था।
रीतलाल वर्मा द्वारा महत्वपूर्ण योगदान
काेडरमा-गिरिडीह रेलखंड में महत्वपूर्ण योगदान लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर विधानसभा से इस्तीफा देने वाले रीतलाल प्रसाद वर्मा पूरे देश के इकलौते विधायक थे। 1977 में जनता दल ने उन्हें जनसंघ कोटे से उम्मीदवार बनाया और वे कोडरमा सीट पर कब्जा जमाने में सफल रहे। स्वर्गीय वर्मा न सिर्फ सांसद के रूप में कोडरमा का प्रतिनिधित्व किया बल्कि पूर्व में जनसंघ और बाद में भाजपा के लिए इस क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक जमीन भी तैयार किए, जिसका लाभ आज भी भाजपा को मिलते आ रहा है। संसदीय कार्यकाल में उन्होंने इस क्षेत्र में विकास के कई उल्लेखनीय कार्य किए जिसमें वनांचल के नाम से वर्तमान झारखण्ड की मांग की नींव रखी। कोडरमा- गिरिडीह रेलखंड के अलावा पूरे देश में चलने वाले ई-रिक्शा उन्हीं के प्रयासों का फलाफल है।
बड़े पुत्र प्रणव वर्मा राजनीति में सक्रिय
- जननायक रीतलाल वर्मा के बड़े पुत्र प्रणव वर्मा जो अभी राजनीति में सक्रिय है और झारखंड मुक्ति मोर्चा,केंद्रीय समिति सदस्य के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कोडरमा के पूर्व सांसद रीतलाल वर्मा की पुण्यतिथि 15 जनवरी को भंडारो स्थित समाधि स्थल पर सादगीपूर्ण मनाई जाएगी।











