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January 23, 2026 7:02 pm

स्वदेशी अपनाकर ही बनेगा आत्मनिर्भर भारत, स्थानीय शिल्पकारों का बढ़ेगा मान: मंगल सिंह

पत्रकार – सौरभ मित्तल

मेदिनीनगर : पलामू की धरती पर स्थानीय कला और हुनर को नई पहचान देने के उद्देश्य से आज संस्कृत विद्यालय प्रांगण (भारत माता चौक) में “स्वाभिमान स्वदेशी सह प्रदर्शनी एवं बिक्री” का भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि और प्रथम उप महापौर राकेश कुमार सिंह उर्फ मंगल सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।

​शिल्पकारों के सम्मान से बढ़ेगी देश की शान
​उद्घाटन के बाद जनसमूह को संबोधित करते हुए मंगल सिंह ने स्वदेशी की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि हमारे देश की आर्थिक आजादी का मंत्र है। उन्होंने स्पष्ट किया:

​आर्थिक मजबूती: जब हम स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं, तो पैसा सीधे हमारे अपने कारीगरों के घर पहुंचता है।
​आत्मसम्मान: वर्षों से उपेक्षित बुनकरों और हस्तशिल्पियों को ऐसे मंचों के माध्यम से समाज में उचित पहचान और सम्मान मिल रहा है।
​सरकार का विजन: केंद्र और राज्य सरकारें लगातार हस्तशिल्प और हैंडलूम को बढ़ावा दे रही हैं ताकि ‘वोकल फॉर लोकल’ का सपना धरातल पर उतरे।
​”सच्चा आत्मनिर्भर भारत तभी बनेगा जब हम विदेशी ब्रांड्स का मोह छोड़कर अपने मिट्टी के हुनरमंदों द्वारा बनाई गई वस्तुओं को अपने घरों में जगह देंगे।” — मंगल सिंह, उप महापौर

​प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण
​इस प्रदर्शनी में शिल्पकारों की अद्भुत कला का संगम देखने को मिला। मेले में मुख्य रूप से निम्नलिखित स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे:
​हैंडलूम वस्त्र: पारंपरिक बुनाई से तैयार आकर्षक साड़ियां और कपड़े।
​हस्तशिल्प: घर की सजावट के लिए हस्तनिर्मित कलाकृतियां।
​दैनिक उपयोगी वस्तुएं: मिट्टी और लकड़ी से बने घरेलू सामान।
​जनता का उत्साह और सामाजिक संदेश
​कार्यक्रम में न केवल राजनेता बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता और भारी संख्या में स्थानीय नागरिक भी पहुंचे। लोगों ने बढ़-चढ़कर खरीदारी की, जो इस बात का प्रमाण है कि अब मेदिनीनगर की जनता स्वदेशी के प्रति जागरूक हो रही है। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के मेलों से शहर की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार की प्रेरणा मिलेगी।

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