125 साल की DGMS यात्रा का उत्सव, पछवाड़ा नॉर्थ खदान में सुरक्षा के नाम रहा पूरा दिन
नाटक, गीत और सम्मान के साथ दिया सुरक्षा का संदेश, पछवाड़ा नॉर्थ खदान में दिखा जागरूकता उत्सव।
अमडापाड़ा/पाकुड़। प्रखंड के आलूबेड़ा स्थित पछवाड़ा नॉर्थ कोयला खदान में सोमवार को वार्षिक खान सुरक्षा पखवाड़ा 2025 का आयोजन पूरे उत्साह और गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन खदान परिसर स्थित कैंप में किया गया, जहां डीजीएमएस और बीसीसीएल से पहुंची निरीक्षण टीम का पारंपरिक संथाली नृत्य, सुरक्षा कर्मियों की मार्च पास्ट और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भव्य स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुरक्षा ध्वज के झंडोत्तोलन और सुरक्षा शपथ के साथ हुई। इसके बाद दीप प्रज्वलन कर औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर डीजीएमएस के 125 वर्ष पूर्ण होने पर जारी की गई थीम सॉन्ग का प्रदर्शन भी किया गया।
डब्लूबीपीडीसीएल के जनरल मैनेजर रामाशीष चटर्जी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि खदानों में सुरक्षित कार्य संस्कृति विकसित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी अतिथियों और कर्मचारियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान खदान कर्मियों द्वारा सुरक्षा विषय पर एक प्रेरणादायक नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें हास्य के माध्यम से सुरक्षा के महत्वपूर्ण संदेश दिए गए। नाटक को उपस्थित अतिथियों और कर्मचारियों ने खूब सराहा। इसके अलावा एक कर्मचारी द्वारा प्रस्तुत सुरक्षा गीत ने भी लोगों को जागरूक किया।
इस अवसर पर खदान में विभिन्न विभागों में उत्कृष्ट सुरक्षा मानकों के साथ कार्य करने वाले कर्मियों को उपहार देकर सम्मानित किया गया। मंच संचालन अभिलाष कुमार पियूष ने किया। इसके बाद डीजीएमएस सेंट्रल जोन से आए डॉ. के. माधव राव (डीएमएस) तथा बीसीसीएल की संयुक्त निरीक्षण टीम—जी.एल. धुर्वे (एजेंट), अजय कुमार विश्वकर्मा (मैनेजर), सूरज प्रकाश वर्मा (इंजीनियर ईएंडएम), प्रताप चंद्र साहू (इंजीनियर एक्सकेवेशन), आलोक कुमार आलोक (वर्कमैन इंस्पेक्टर) और ओमप्रकाश (सर्वेयर)—ने खदान का निरीक्षण किया। टीम ने खदान में अपनाई जा रही सुरक्षा व्यवस्थाओं और कार्यशैली की सराहना की। मौके पर डब्लूबीपीडीसीएल के खान प्रबंधक महेश कुमार, सेफ्टी ऑफिसर सी.के. घोष, वेलफेयर ऑफिसर देवाशीष भुई, बीजीआर कंपनी से गुर्रम वेंकट नारायण, पी.वी. शिवचंद्रा, चंद्रशेखर, मोहन रेड्डी सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा कर्मी उपस्थित थे।








