पत्रकार अंकित कुमार लाल
मेदिनीनगर: मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव को लेकर शहर में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। संभावित मेयर प्रत्याशी और वार्ड पार्षद उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए जनता के बीच जाकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। लेकिन धरातल पर सच्चाई इन दावों से कोसों दूर है।
कचरे के ढेर में वार्ड 27 और दुर्गंध से परेशान वार्ड 25
वार्ड संख्या 27 के विभिन्न हिस्सों में कचरे का अंबार लगा हुआ है। नियमित सफाई न होने के कारण सड़कों के किनारे गंदगी बिखरी पड़ी है, जिससे स्थानीय निवासियों को संक्रामक बीमारियों का डर सता रहा है। वहीं, वार्ड संख्या 25 की स्थिति और भी बदतर है। यहां नालियों की सफाई महीनों से नहीं हुई है। जाम पड़ी नालियों से उठने वाली तीव्र बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले तो बहुत आते हैं, लेकिन इस दुर्गंध और गंदगी से निजात दिलाने वाला कोई नहीं है।
वार्ड 26: सड़क पर बह रहा नाली का पानी
वार्ड संख्या 26 की समस्या सबसे गंभीर दिखी, जहां नाली का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। राहगीरों और स्थानीय लोगों को मजबूरन इसी गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनके पैरों और कपड़ों में गंदगी लग रही है। जलजमाव की यह स्थिति न केवल आवागमन को बाधित कर रही है, बल्कि सड़क की स्थिति को भी और जर्जर बना रही है।
प्रत्याशियों और पार्षदों की चुप्पी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि नगर निगम चुनाव को लेकर हर तरफ ‘विकास’ की बातें हो रही हैं, लेकिन इन बुनियादी समस्याओं पर किसी भी प्रमुख मेयर प्रत्याशी या निवर्तमान वार्ड पार्षद का ध्यान नहीं जा रहा है। जनता का सवाल है कि यदि वर्तमान प्रतिनिधि और भविष्य के दावेदार अभी इन छोटी मगर महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे, तो चुनाव जीतने के बाद शहर की सूरत कैसे बदलेगी?
मुख्य मुद्दे: मरम्मत और नियमित सफाई की मांग
हर चुनाव में सड़क और नाली का मुद्दा प्राथमिकता पर रहता है, लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि ये मुद्दे केवल कागजों और भाषणों तक सीमित हैं। जनता अब खोखले वादों से ऊब चुकी है और ठोस कार्यवाही की मांग कर रही है। क्या चुनाव से पहले इन वार्डों की नालियों की मरम्मत और सफाई होगी, या जनता को इसी नारकीय स्थिति में रहकर अपना मतदान करना पड़ेगा?








