राजकुमार भगत
पाकुड़। ज्ञान, विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी के अवसर पर शुक्रवार 23 जनवरी को पूरे श्रद्धा-उत्साह के साथ की जाएगी। जिलेभर में पूजा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। घरों, स्कूलों, कॉलेजों, शिक्षण संस्थानों और कार्यालयों में मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इस वर्ष बसंत पंचमी को विशेष शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होगा और गुरु की स्थिति चतुर्थ भाव में रहेगी। यह संयोग विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों और रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
भारतीय पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी की रात 2:29 बजे से हो चुकी है, जो 23 जनवरी की रात 1:45 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार सरस्वती पूजा 23 जनवरी को ही संपन्न की जाएगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी के दिन सुबह 9:53 बजे से 11:13 बजे तक मां सरस्वती की पूजा के लिए उत्तम मुहूर्त है। वहीं सुबह 8:33 से 9:53 बजे तक लाभ चौघड़िया और 9:53 से 11:53 बजे तक अमृत चौघड़िया में भी पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है।
विधि-विधान से होगी पूजा
पूजा के दौरान मां सरस्वती को अक्षत, चंदन, धूप, दीप, पुष्प, फल, नैवेद्य और गुलाल अर्पित किया जाएगा। विद्या और ज्ञान की प्राप्ति के लिए छात्र-छात्राएं विशेष रूप से कलम, किताब और वाद्य यंत्र मां के चरणों में अर्पित करेंगे। मंत्रोच्चार और पुष्पांजलि के साथ पूजा संपन्न होगी। बसंत पंचमी के साथ ही बसंत ऋतु का औपचारिक आगमन भी माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करने और सात्विक भोजन करने की परंपरा है। मान्यता है कि मां सरस्वती की आराधना से ज्ञान, बुद्धि, कला और विवेक में वृद्धि होती है तथा साधक पर मां की कृपा बनी रहती है।









