अक्षय कुमार सिंह
बोकारो। राजेन्द्र चौधरी, जो SAIL/बोकारो स्टील प्लांट के रिटायर्ड कर्मचारी हैं, उन्होंने अपने और पत्नी के लिए मेडिक्लेम हेल्थ इंश्योरेंस लिया था और समय पर पूरा प्रीमियम जमा किया था। नवंबर 2018 में दिल की बीमारी के कारण उन्हें B.M. Birla Heart Research Centre, कोलकाता में दो बार भर्ती होना पड़ा। बीमा पॉलिसी चालू होने के बावजूद कैशलेस इलाज देने से मना कर दिया गया, यह कहकर कि पॉलिसी कैंसिल है। मरीज को मजबूरी में ₹1,74,325/- अपनी जेब से खर्च करने पड़े। कई बार मांग करने और लीगल नोटिस देने के बाद भी बीमा कंपनी ने भुगतान नहीं किया। इस कारण उन्होंने उपभोक्ता आयोग में केस किया। मुख्य कानूनी बिंदु इस प्रकार है वादी ने समय पर पूरा प्रीमियम जमा किया था। बीमा कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि पॉलिसी क्यों कैंसिल की कब और कैसे इसकी सूचना दी?कैशलेस सुविधा का इनकार मनमाना और गलत पाया गया। बीमा कंपनी की ओर से यह नहीं कहा गया कि इलाज पॉलिसी के दायरे में नहीं था। दावा अमान्य था। अतः आयोग ने माना कि यह सेवा में गंभीर कमी है अंतिम आदेश के रूप मे यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (OP No.4) को आदेश दिया गया कि ₹1,74,325/- वादी को चुकाए। यह भुगतान 90 दिनों के भीतर भुगतान करे। देरी होने पर 8 नवम्बर 2019 से 10% वार्षिक ब्याज देना होगा। साथ ही 5 हजार का मानसिक प्रताड़ना मुआवज़ा भी लगाया और 5,000/- केस खर्च। अगर बीमा प्रीमियम ट्रांसफर में SAIL (OP No.2) की गलती है, तो उसकी सज़ा वादी को नहीं दी जाएगी। बीमा कंपनी चाहे तो बाद में SAIL से पैसा वसूल सकती है।










