कुजू। बाल विद्या मंदिर, आरा कोलियरी के प्राचार्य रंजीत कुमार सिंह ने पराक्रम दिवस के महत्व का वर्णन करते हुए बताया कि यह दिन

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य उनके साहस, नेतृत्व, देशभक्ति और स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान को सम्मान देना और देशवासियों में वीरता व राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रेरित करना है। भारत सरकार ने 2021 से 23 जनवरी को आधिकारिक रूप से पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। श्री सिंह ने बताया कि नेताजी का योगदान भारत के स्वतंत्रता की लड़ाई में अमर है। उन्होंने सीमित संसाधनों एवं शक्ति के बल पर अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। बताया जाता है कि नेताजी युवावस्था से ही देश प्रेम की भावना का महत्व समझ गए थे। उनमें देशप्रेम कूट-कूट कर भरा था। उन्होंने स्मरण करते हुए बताया कि रामगढ़ की ऐतिहासिक नगरी में एक बार सुभाष चंद्र बोस का आगमन हुआ था और आज यही कारण है कि सुभाष चौक रामगढ़ का एक प्रमुख पहचान चिन्ह है। श्री सिंह ने आगे बताया कि नेता जी भारत के आजादी के कुछ वर्ष पूर्व रामगढ़ में एक सम्मेलन किया था और यह सम्मेलन मौजूद फुटबॉल ग्राउंड के निकट आयोजित की गई थी। उन्होंने सभी देशवासियों से सुभाष चंद्र बोस के आदर्श एवं हौसले को सदैव अमर रखने की बात कही।











