पत्रकार अंकित कुमार लाल
चैनपुर: ज्ञान सागर पब्लिक स्कूल, चैनपुर में आज विधिवत रूप से सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों को भी आमंत्रित किया गया तथा सभी को समान रूप से प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, अनुशासन और सौहार्द से परिपूर्ण रहा।
इस अवसर पर पत्रकार अंकित कुमार लाल से बातचीत के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य ने विद्यालय की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के महंगाई भरे दौर में कई अभिभावक आर्थिक कारणों से अपने बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं रखना चाहते। इसी उद्देश्य से विद्यालय द्वारा “तीन बच्चों पर एक बच्चा निःशुल्क” शिक्षा की व्यवस्था की गई है, ताकि आर्थिक स्थिति शिक्षा में बाधा न बने।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेलकूद की समुचित व्यवस्था है। हाल ही में आयोजित साइंस एजुकेशन कार्यक्रम में छात्रों ने स्वयं अपने हाथों से विज्ञान से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट तैयार कर प्रस्तुत किए, जिससे उनकी रचनात्मकता और व्यावहारिक ज्ञान का परिचय मिला।

प्रधानाचार्य ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और इसका अध्ययन छात्रों के बौद्धिक विकास के लिए आवश्यक है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आधुनिक समय की आवश्यकता को समझते हुए कंप्यूटर शिक्षा को भी समान महत्व दिया जा रहा है, क्योंकि आज के युग में सभी विषयों का समन्वित ज्ञान जरूरी है।
उन्होंने जानकारी दी कि विद्यालय की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी, जब छात्रों की संख्या लगभग 50 थी, जबकि वर्तमान में विद्यालय में 250 से 300 छात्र अध्ययनरत हैं। विद्यालय की फीस क्षेत्र में सबसे कम रखी गई है और फिलहाल नामांकन पूर्णतः निःशुल्क है।
छात्रों की सुविधा के लिए विद्यालय की बस सेवा भी संचालित है, जो वर्तमान में सीमित क्षेत्र तक है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर डाल्टनगंज शहर तक विस्तार की योजना भी है। विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को अनुशासन, संस्कार, बड़ों का सम्मान और मोबाइल के सही उपयोग की भी शिक्षा दी जाती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय कमिटी सदस्य आभाष कुमार पत्रकार को गेम रूम में ले गए, जहाँ बच्चों द्वारा बनाई गई विभिन्न कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई थीं। छोटी उम्र के छात्रों द्वारा प्रस्तुत ये कलाकृतियाँ अत्यंत आकर्षक और प्रेरणादायक थीं, जो आमतौर पर बड़े और प्रतिष्ठित विद्यालयों में ही देखने को मिलती हैं।






