पत्रकार अंकित कुमार लाल
मेदिनीनगर (डाल्टनगंज): डाल्टनगंज नगर निगम की प्रथम महापौर अरुणा शंकर द्वारा हाल ही में जारी की गई एक पुस्तक को लेकर शहर की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। इस पुस्तक में जहां वार्ड पार्षदों के कार्यों और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है, वहीं एक अहम नाम—प्रथम उप महापौर राकेश कुमार सिंह उर्फ मंगल सिंह—का उल्लेख तक न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
नगर निगम के संचालन में उप महापौर की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जानकारों का कहना है कि महापौर के साथ-साथ उप महापौर नगर निगम के प्रशासनिक निर्णयों, विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। ऐसे में प्रथम उप महापौर का नाम पुस्तक से पूरी तरह गायब होना स्वाभाविक रूप से लोगों को हैरान कर रहा है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि आखिर किस मंशा से प्रथम महापौर ने अपने कार्यकाल से जुड़ी इस पुस्तक में उप महापौर को स्थान नहीं दिया। क्या यह केवल एक चूक है या इसके पीछे कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत कारण छिपा है—यह अब सार्वजनिक बहस का विषय बन चुका है।
इतना ही नहीं, पुस्तक में महापौर द्वारा अपने निजी खर्चों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है, जिसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब यह एक नगर निगम से जुड़ा आधिकारिक दस्तावेज़नुमा प्रकाशन है, तो इसमें व्यक्तिगत खर्चों को प्रमुखता क्यों दी गई।
शहर के नागरिकों, पार्षदों और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस पूरे मामले पर महापौर या उप महापौर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं। फिलहाल यह मुद्दा डाल्टनगंज में चर्चा, सवाल और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।






