ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता में स्कूल-अस्पताल बहाली का आश्वासन।
अमड़ापाड़ा अंचल स्थित पचुवाड़ा सेंट्रल कोल माइंस में विस्थापित व प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान को लेकर गुरुवार को आलूबेड़ा डाक बंगला मैदान में जिला प्रशासन की मौजूदगी में कंपनी और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। बैठक में प्रशासन, कोल ब्लॉक प्रबंधन और सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। वार्ता में अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन, एसडीओ साइमन मरांडी, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अजय बड़ाइक, सहायक खनन पदाधिकारी नितेश कुमार, अंचलाधिकारी औसफ अहमद, महेशपुर एसडीपीओ विजय कुमार, अमड़ापाड़ा थाना प्रभारी मदन शर्मा उपस्थित थे। वहीं कंपनी की ओर से सेंट्रल कोल ब्लॉक के आवंटी पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) के एजेंट राकेश सिंह, एमडीओ डीबीएल के एवीपी ब्रजेश कुमार और सजीव सिंह मौजूद रहे।
पहले भी ठप हो चुका है कोयला उत्खनन
विस्थापित ग्रामीणों ने बताया कि भू-अर्जन, नौकरी, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर पहले भी कोयले का उत्खनन और परिवहन ठप किया जा चुका है। प्रशासन की पहल पर ही त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई। ग्रामीणों ने बैठक में पूर्व भूमि अधिग्रहण से जुड़े कागजात उपलब्ध कराने, रोजगार, अस्पताल, स्कूल और बिजली जैसी सुविधाओं की मांग रखी। इस पर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि सेंट्रल कोल ब्लॉक के लिए भूमि अधिग्रहण पूर्व में ही पूरा हो चुका है और दोबारा अधिग्रहण कर नए सिरे से मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। अधिकारियों ने ग्रामीणों से किसी भी तरह के बहकावे में न आने की अपील की।
तीन माह में स्कूल-अस्पताल बहाली का भरोसा
स्कूल और अस्पताल की मांग पर कंपनी प्रबंधन ने तीन माह के भीतर भवनों के जीर्णोद्धार और सभी सुविधाएं बहाल करने का आश्वासन दिया। बताया गया कि अस्पताल के लिए दो डॉक्टरों की नियुक्ति कर दी गई है। साथ ही स्थानीय युवाओं के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोलने की भी घोषणा की गई।
समन्वय के लिए बनेगी ग्रामीणों की कमेटी
भविष्य में समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रशासन ने विस्थापित गांवों के प्रमुख लोगों को शामिल कर एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिया, ताकि कंपनी और प्रशासन सीधे कमेटी के माध्यम से संवाद कर सके। बैठक में रंजन मरांडी, प्रधान मुर्मू, कॉर्नेल हांसदा, नजीर सोरेन, राजू मुर्मू, हिमांशु मुर्मू, आंद्रियास, बरनवास, लखीराम सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।






