सिस्टम सुधार और पूंजी निवेश पर सरकार का दांव, 12.20 लाख करोड़ का कैपेक्स
राजकुमार भगत | पाकुड़
वैश्विक आर्थिक सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आम बजट 2026-27 पेश किया। इस बार का बजट न तो लोकलुभावन रहा और न ही आम जनता को लुभाने वाले बड़े ऐलानों से भरा दिखा। सरकार ने साफ संकेत दिया कि उसकी प्राथमिकता अल्पकालिक लोकप्रियता नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती है।
टैक्स राहत से दूरी, आम आदमी मायूस
बजट में न तो इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव किया गया और न ही मध्यम वर्ग को सीधी राहत देने वाली कोई घोषणा हुई। इससे आम नौकरीपेशा, मध्यम वर्ग और महंगाई से जूझ रहे परिवारों में निराशा देखने को मिली। बजट से पहले जिस तरह टैक्स राहत और महंगाई नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही थी, वह इस बार पूरी नहीं हो सकी।
12.20 लाख करोड़ का पूंजीगत खर्च, सरकार का बड़ा दावा
बजट का सबसे बड़ा फोकस पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) पर रहा। सरकार ने इसे बढ़ाकर 12.20 लाख करोड़ रुपए करने का ऐलान किया है। सरकार का कहना है कि इस निवेश से सड़क, रेल, आवास, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही इससे रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
वित्त मंत्रालय का दावा है कि पूंजीगत निवेश से निजी क्षेत्र को भी निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक असर दिखाई देगा।
विपक्ष का हमला, बताया “झुनझुना बजट”
विपक्षी दलों ने बजट को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि यह बजट आम जनता की समस्याओं से कटा हुआ है। महंगाई, बेरोजगारी और आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाने को लेकर बजट में कोई ठोस उपाय नहीं दिखता। विपक्ष ने इसे “झुनझुना बजट” बताते हुए कहा कि बड़े आंकड़ों के पीछे आम लोगों की परेशानी छुपाई जा रही है।
पाकुड़ में मिली-जुली प्रतिक्रिया
पाकुड़ जिले में भी बजट को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह बजट बड़े बदलाव लाने के बजाय सिस्टम को धीरे-धीरे मजबूत करने की कोशिश है।
समाजसेवी प्रमोद सिन्हा ने कहा कि बजट दीर्घकालिक नजरिए से दूरदर्शी हो सकता है, लेकिन मध्यम वर्ग और आम नागरिकों के लिए इसमें कोई तात्कालिक राहत नजर नहीं आती। उनका कहना है कि महंगाई और रोजगार की चुनौती से जूझ रहे लोगों को इस बजट से तुरंत फायदा मिलने की उम्मीद कम है।
दीर्घकालिक विकास बनाम तात्कालिक राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने इस बार लोकलुभावन फैसलों से दूरी बनाकर लंबी अवधि के विकास मॉडल को चुना है। हालांकि सवाल यह है कि जब आम जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है, तब केवल भविष्य के वादों के सहारे कितनी संतुष्टि मिल पाएगी।
कुल मिलाकर
बजट 2026-27 को लेकर जिले में साफ मतभेद दिखाई दे रहे हैं।
सरकार समर्थक इसे मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की नींव बता रहे हैं, जबकि आम लोग और विपक्ष इसे जनता की जेब पर तत्काल असर न डालने वाला बजट मान रहे हैं। आने वाले समय में यह साफ होगा कि पूंजीगत खर्च का यह बड़ा दांव जमीन पर कितना असर दिखा पाता है।











