नो दिवसीय श्रीराम कथा में श्रोताओ की उमड़ी भीड़।
राहुल दास
हिरणपुर (पाकुड़): मनुष्य की मन व काया स्वस्थ्य रहने से भगवान की प्राप्ति होती है। इसलिए अपने मन को पवित्र रखे। मनोकामना नाथ मंदिर समिति द्वारा दराजमाठ में आयोजित नो दिवसीय श्रीराम संगीतमय कथा व ज्ञान यज्ञ में शुक्रवार देरशाम उपस्थित लोगों के बीच प्रवचन करते हुए वृंदावन से आये कथा वाचिका साध्वी प्रियंका शास्त्री ने कही। रामकथा के प्रथम दिन प्रवचन के पूर्व साध्वी ने मण्डप में बाल गोपाल की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद भगवान की भजन गाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला परिषद उपाध्यक्ष अशोक भगत , जिप सदस्य प्रियंका देवी , पास्टर सोरेन आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उपस्थित लोगों के बीच प्रवचन देते हुए साध्वी ने बताई की घर रघुकुल जैसा होना चाहिए , जहां संस्कारमय आपसी भाईचारा हो। वही नगरी अयोध्या सरह हो। जिससे कि अध्यात्मक का प्रभाव व्याप्त हो। मनुष्य के शरीर मे 10 दरवाजा है। जो जीवन के हर पल अपने अपने कार्य का निर्वाह करते आ रहा है। जिसमे परमात्मा का अंश भी पलता है। उन्होंने बताई की शरीर पांच तत्वों से बना हुआ है। हम अपने इस शरीर को आध्यात्मिक कार्य मे लगाना जरूरी है। संतो की संगत से भगवान की दर्शन होती है। मानव जीवन संसार की महत्वपूर्ण रचना है। जो सांसारिक कार्यो के अलावे ईश्वर भक्ति , सत्संग आदि व्याप्त रहता है। जबकि पशुओ में डर , जन्म , भोजन के अलावे कुछ नही पाया जाता। मनुष्य के सात गुण ज्ञान , शील आदि समाहित है। पर मन को लगाम देना जरूरी है। क्योंकि मन काफी चंचल रहता है। जो कभी भी भटक सकता है। इसलिए मन को दास बना लो।रामकथा सबसे पहले भगवान शंकर ने माता पार्वती को सुनाई थी।जिसे कौवे के रूप में काकभुशुण्डि ने भी सुना था। राक्षसों के अत्याचार को समाप्त करने व रावण की वध के लिए भगवान विष्णु के रूप में अवतार लेने के लिए ऋषिराज नारद का श्राप के साथ साथ जय विजय की कहानी सुनाई जाती है। सृष्टि में बढ़ रहे पापो का वर्णन व भगवान की अवतरित होने की प्रतिज्ञा की जाती है। रामकथा के दिव्य वातावरण से जोड़ना आवश्यक है। इस अवसर पर आयोजित समिति के सभी सदस्य उपस्थित थे।






