राहुल दास
हिरणपुर (पाकुड़): गुरु दीक्षा बिना जीवन मे सब व्यर्थ है। इसलिए गुरु बिना भवसागर पार नही हो सकती। दराजमाठ में आयोजित श्रीरामकथा के द्वितीय दिन उपस्थित लोगों के बीच प्रवचन करते हुए कथा वाचिका साध्वी प्रियंका शास्त्री ने कही। साध्वी ने कही की गुरु ब्रम्हा , गुरु विष्णु , गुरु महेश्वर। गुरु ज्ञान की सृजन है। गुरु कृपा से ही ईश्वर की दर्शन सुलभ है। उन्होंने कहा कि इस कलयुग में हनुमान जी ही श्रेष्ठकर है। इनकी कृपा से ही सभी कार्य सिद्ध होता है। जो भगवन राम ने नही कर सका , वह इनके कृपा से हनुमान ने कर दिखाया। भगवान राम की राज्याभिषेक में देवी सीता ने प्रभु राम से कहा कि सभी को आपने दान दिया , पर परम् भक्त को कुछ नही दिया। इस पर श्रीराम ने हनुमान से पूछा तो किसी भी पद लेने से साफ इंकार कर दिया। इसको लेकर उपस्थित राजा महाराजाओं ने तंज कसा। तब श्रीराम ने एक मोती जड़ित माला दिया। जिसे तुरन्त हनुमान ने तोड़कर फेंक दिया। जब एक सच्ची भक्त की परिभाषित करने की बारी आई तो हनुमान ने छाती फाड़कर दिखा दिया कि रामभक्त कौन है। उन्होंने आगे कहा कि लोग शराब पीकर अपनी गम को भुलाने का प्रयास करता है। जो परिवार व स्वस्थ्य के लिए हानिकारक है। श्रीराम की श्रवण से ही सभी गम समाप्त हो जाता है। संसार माया से भरा हुआ है। संसार ही सत्य नही है। जीवन के सुख दुख की मायाजाल में डूबा हुआ है। प्रेम बदलते जा रहा है।पर ब्रम्ह परम् सत्य है। मृत्यु ही एक मात्र सत्य है। इसलिए जय सिया राम की भजन से हमे मुक्ति मिलती है।
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