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February 16, 2026 11:29 pm

नगर निकाय चुनाव, सियासी खींचतान तेज, भाजपा में बगावत तो महागठबंधन में दो राहें।

पाकुड़। नगर निकाय चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे पाकुड़ की सियासत और गरमा गई है। इस बार का चुनाव सिर्फ अध्यक्ष पद का नहीं, बल्कि दलों के भीतर की एकजुटता और रणनीति की भी परीक्षा बनता दिख रहा है। भाजपा खेमे में जहां अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ चुकी है, वहीं महागठबंधन भी एक सुर में नजर नहीं आ रहा। नगर परिषद क्षेत्र के 37,033 मतदाता अब यह तय करेंगे कि अध्यक्ष की कुर्सी किसके हिस्से आएगी।

भाजपा में समर्थन एक, मैदान में चार, कोई ग्रेजुएट तो कोई आठवीं पास।

अध्यक्ष पद के लिए कुल 10 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें से संपा साहा, शबरी पाल, पूनम देवी और ज्योति दुबे भाजपा पृष्ठभूमि से जुड़ी मानी जा रही हैं। भाजपा ने आधिकारिक तौर पर पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष संपा साहा को समर्थन दिया है, लेकिन पार्टी के भीतर बगावत ने मुकाबले को उलझा दिया है। पिछले हफ्ते नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने भरोसा जताया कि चुनाव से पहले असंतोष दूर हो जाएगा और बागी तेवर नरम पड़ेंगे। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि पार्टी समर्थित प्रत्याशी को अपने ही खेमे से कड़ी चुनौती मिल रही है। साथ ही शहर की लंबित समस्याएं भी उनके लिए चुनौती बन सकती हैं।

महागठबंधन में तालमेल की कमी

दूसरी ओर महागठबंधन भी पूरी तरह एकजुट नजर नहीं आ रहा। कांग्रेस ने मोनिता कुमारी को समर्थन देने का ऐलान किया है, जबकि महागठबंधन के प्रमुख घटक झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शेख सेलिना सुलताना के पक्ष में मोर्चा खोल दिया है। दोनों दलों के अलग-अलग प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय से भी आगे बढ़ता दिख रहा है।

किसके पक्ष में जाएगा जनमत?

एक ओर भाजपा की अंदरूनी खींचतान, दूसरी ओर महागठबंधन में समन्वय की कमी—इन दोनों के बीच मतदाता असली निर्णायक भूमिका में हैं। साफ है कि इस बार पाकुड़ का नगर निकाय चुनाव सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि दलों की साख और संगठनात्मक मजबूती का भी इम्तिहान होगा।

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