भर्ती, सुरक्षा और अधिकारों की मांग को लेकर रेलकर्मियों ने दिखाई एकजुटता।
पाकुड़। ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के तत्वावधान में ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन कोलकाता के बैनर तले ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन, पाकुड़ शाखा द्वारा जागरूकता सह संकल्प रैली का आयोजन किया गया। रैली की अगुवाई शाखा अध्यक्ष कॉमरेड अखिलेश चौबे ने की। शाम 4 बजे यूनियन कार्यालय से निकली पदयात्रा प्लेटफॉर्म संख्या-1 से होते हुए पाकुड़ यार्ड पहुंची, जहां कर्मचारियों को संबोधित करने के बाद रैली का समापन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए शाखा सचिव संजय कुमार ओझा ने कहा कि पाकुड़ में रेलवे कर्मचारियों की सुविधाओं को लेकर किए गए अधिकांश वादे पूरे किए जा चुके हैं, जबकि शेष कार्य मार्च तक पूरा करने की योजना है। उन्होंने गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि विभिन्न विभागों में भारी स्टाफ कमी के कारण कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक दबाव है, जिससे कार्य गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। यूनियन ने मांग की कि कर्मचारियों की कमी दूर की जाए और कार्य पूरा करने के लिए यथोचित समयसीमा दी जाए। ओझा ने ओपन लाइन में कार्यरत पर्यवेक्षकों की स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि निरंतर दबाव और 24 घंटे की जिम्मेदारियों के चलते लगभग 80 प्रतिशत सुपरवाइजर उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग से ग्रसित पाए गए हैं। यूनियन ने प्रशासन से मांग की कि इस संवर्ग को प्रतिदिन कम से कम 6–8 घंटे की निर्बाध नींद का अवकाश सुनिश्चित किया जाए, ताकि कार्य गुणवत्ता बनी रहे।
कोलकाता से आए केंद्रीय सहायक सचिव पलाश घोष ने कहा कि केंद्र सरकार नए पदों का सृजन नहीं कर रही है, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है और रेल जैसी संवेदनशील सेवा में सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने रेलवे में निजीकरण और सुरक्षा श्रेणी में बाहरी बहाली का विरोध दोहराया। साथ ही नए श्रम कानून को “कर्मचारी विरोधी” बताते हुए संगठित प्रतिरोध का आह्वान किया।
यूनियन ने रनिंग स्टाफ के किलोमीटर भत्ते में 25% वृद्धि, सभी श्रेणियों के लिए रिस्क अलाउंस बहाली, लेटरल इंडक्शन, एकीकृत पेंशन योजना में सुधार, आठवें वेतन आयोग के शीघ्र गठन और पॉइंट्समैन के लिए चार-स्तरीय पे संरचना जैसी मांगें दोहराईं। सभा के समापन पर शाखा अध्यक्ष अखिलेश चौबे ने उपस्थित सभी कर्मचारियों का आभार जताया। बड़ी संख्या में जुटे कर्मचारियों के जोश से यह साफ दिखा कि रेलवे प्रशासन की नीतियों को लेकर कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।


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