जिला संवाददाता अंकित कुमार लाल
नगर निकाय चुनाव के अंतिम दिनों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। जिन प्रत्याशियों पर कुछ दिन पहले तक सार्वजनिक मंचों से सवाल उठाए जा रहे थे, अब उन्हीं के समर्थन में आवाज़ें बुलंद होती दिख रही हैं। इससे मतदाताओं के बीच चर्चा और संशय दोनों बढ़ गए हैं।
चुनावी प्रचार के शुरुआती दौर में कई उम्मीदवारों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों के पूर्व कार्यकाल पर सवाल खड़े किए थे। आरोप लगाए गए थे कि विकास कार्यों में अपेक्षित गति नहीं रही और जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। लेकिन मतदान से ठीक पहले वही प्रत्याशी आपसी समझौते और समर्थन की राजनीति करते नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव चुनावी गणित और वोटों के ध्रुवीकरण का परिणाम हो सकता है। अंतिम चरण में जीत सुनिश्चित करने के लिए कई उम्मीदवार रणनीतिक गठजोड़ कर रहे हैं। हालांकि जनता के बीच यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि यदि पहले लगाए गए आरोप सही थे, तो अब समर्थन क्यों? और यदि समर्थन उचित है, तो पहले की आलोचना किस आधार पर की गई थी?





