इकबाल हुसैन
महेशपुर प्रखंड के सोनारपाड़ा गांव में आत्मा पाकुड़ की पहल पर 30 किसानों के समूह को बायोफ्लॉक तकनीक का परिभ्रमण कराया गया। मौके पर बायोफ्लॉक संचालक बिट्टू कुमार दास ने किसानों को आधुनिक पद्धति से मछली पालन की पूरी प्रक्रिया को现场 (लाइव) दिखाकर समझाया। एटीएम संतानु शील ने बताया कि बायोफ्लॉक तकनीक वैज्ञानिक तरीका है, जिसमें मछलियों के बचे हुए चारे को लाभकारी बैक्टीरिया प्रोटीन में बदल देते हैं। यही प्रोटीन मछलियों का अतिरिक्त आहार बनता है, जिससे तेजी से ग्रोथ होती है और पानी की बर्बादी भी नहीं होती। इस तकनीक से कम जगह में, कम लागत और न्यूनतम श्रम में अधिक उत्पादन संभव है। बायोफ्लॉक सिस्टम में पंगेसियस, तिलापिया, मांगुर, सिंघी, कोई कार्प, पाब्दा और कॉमन कार्प जैसी प्रजातियों का पालन किया जा सकता है। कार्यक्रम में अभिजीत सील सहित दर्जनों किसान मौजूद रहे। किसानों ने तकनीक को नजदीक से देखा और इसे अपनाकर आय बढ़ाने में रुचि जताई।






