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March 3, 2026 11:19 pm

मनरेगा की बिरसा हरित ग्राम योजना से तरुण पाल की बंजर ज़मीन बनी आय का स्थायी स्रोत।

पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड के चंडालमारा गाँव के किसान तरुण पाल की किस्मत मनरेगा की बिरसा हरित ग्राम योजना ने बदल दी। वर्षों से बंजर पड़ी एक एकड़ भूमि को 2024–25 में हरियाली के मॉडल के रूप में विकसित कर आज यह उनके लिए स्थायी आजीविका का आधार बन गई है।

बंजर जमीन से हरियाली तक की यात्रा

ग्राम सभा में प्रस्ताव अनुमोदित होने के बाद योजना को पंचायत स्तर पर स्वीकृति मिली और मनरेगा के तहत एक एकड़ क्षेत्र में हरित कार्य शुरू हुआ। कार्य में स्थानीय मजदूरों को भी रोजगार मिला, जिससे गाँव में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ीं।

सिंचाई कूप बना वरदान

मनरेगा से निर्मित सिंचाई कूप ने तरुण पाल की जमीन में नई जान भर दी। आज न सिर्फ़ उनकी खेती सिंचित होती है, बल्कि आसपास के ग्रामीण भी इसका लाभ उठा रहे हैं।

तेजी से बढ़ रही फसलें, बढ़ती मासिक आमदनी

भूमि पर लगाए गए आम, नींबू, कटहल और शीशम के पौधे तेजी से विकसित हो रहे हैं। साथ ही बैंगन, टमाटर और मिर्च की खेती से तरुण पाल को हर महीने ₹5,000–7,000 की आय हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

भविष्य के लिए नई उम्मीदें

तरुण पाल के अनुसार, पेड़ों के बड़े होने पर फलों से अच्छी आमदनी मिलने की उम्मीद है। वे कहते हैं— मनरेगा ने मेरी जमीन को जीवन दिया है। अब यह खेत मेरे परिवार की ताकत बन गया है। मैं इसे और बेहतर बनाऊंगा।

ग्राम पंचायत और प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका

ग्राम रोजगार सेवक, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के कारण यह योजना गाँव में मनरेगा के प्रति विश्वास और प्रेरणा का प्रमुख उदाहरण बन गई है।

मनरेगा—रोजगार, हरियाली और आत्मनिर्भरता का मजबूत मॉडल

तरुण पाल की सफलता यह साबित करती है कि मनरेगा सिर्फ काम ही नहीं देता, बल्कि बंजर जमीन को भी उपयोगी, आय-सृजित संसाधन में बदलने की क्षमता रखता है।

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