हिरणपुर (पाकुड़)। मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार को रानीपुर के समीप परगला नदी किनारे आस्था, विश्वास और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। साफा होड़ समाज के श्रद्धालुओं ने परंपरागत रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना की, वहीं अग्निकुंड में नंगे पांव परिक्रमा कर आस्था की अग्निपरीक्षा दी। इस दौरान नदी तट और मेला परिसर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और दर्शक मौजूद रहे।
परगला नदी किनारे करीब 15 फीट लंबा और तीन फीट चौड़ा अग्निकुंड तैयार किया गया था। गुरुबाबा देबुलाल हांसदा (जामपुर) ने मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना कराई। इसके बाद कुंड में लकड़ियां डालकर अग्नि प्रज्वलित की गई। कुछ देर बाद श्रद्धालु भक्ति भाव से नृत्य करते हुए देवी-देवताओं की आराधना करने लगे और अग्निकुंड के चारों ओर परिक्रमा की। इसके पश्चात गुरुबाबा ने स्वयं अग्निकुंड में नंगे पांव पैदल परिक्रमा की, जिसे देखकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। बाद में कई श्रद्धालुओं ने भी बारी-बारी से अग्निकुंड की परिक्रमा की। गुरुबाबा देबुलाल हांसदा ने बताया कि भगवान के प्रति अटूट आस्था और विश्वास के साथ अग्नि में प्रवेश किया जाता है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में श्रद्धालु सहज रूप से परिक्रमा करते हैं और किसी प्रकार की हानि नहीं होती। उधर, मकर संक्रांति के अवसर पर साफा होड़ समाज के हजारों श्रद्धालु परगला नदी में डुबकी लगाकर देवी-देवताओं को जलाभिषेक करते नजर आए। सफेद वस्त्र धारण किए श्रद्धालुओं ने लोटा में जल भरकर भगवान शिव, मां पार्वती, भगवान राम सहित अन्य देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की। फल-फूल, बतासा अर्पित कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की गई। वाद्ययंत्रों की धुन और भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। इस अवसर पर धर्मगुरु देबुलाल हांसदा, सुबोधन मड़ैया, मातला किस्कू सहित अन्य ने कहा कि यह पर्व आस्था और विश्वास का प्रतीक है, जिसमें समाज के लोग एकजुट होकर भगवान से सभी के स्वस्थ और समृद्ध रहने की प्रार्थना करते हैं। पूजा-अर्चना के साथ-साथ भव्य मेले का भी आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। मेले में खरीदारी और मनोरंजन का दौर दिनभर चलता रहा। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिखा और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही।









