नई दिल्ली। सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में सिंधी भाषा में, देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में भारत का संविधान जारी किया। सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर इस पहल को उन्होंने ऐतिहासिक और सराहनीय बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि विभाजन के बाद के कठिन दौर में सिंधी समुदाय ने अपनी भाषा और संस्कृति को संजोकर रखा, जो आज एकता और दृढ़ता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संविधान का सिंधी भाषा में प्रकाशन भाषाई समावेशिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से सिंधी भाषी लोग अपनी मातृभाषा में संविधान को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी और विश्वास और मजबूत होगा। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, लोकसभा सांसद शंकर लालवानी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।








