संथाल छात्रों को शामिल करने पर आदिम जनजाति संगठन नाराज, बोले—संशोधित मेधा सूची से ही हो दाखिला
पाकुड़/दुमका। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अनुसूचित जनजाति आवासीय बालक उच्च विद्यालय, हिरणपुर की नामांकन प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय आदिमजन-जाति विकास समिति, झारखंड ने उप निदेशक, कल्याण कार्यालय संथाल परगना प्रमंडल (दुमका) को पत्र भेजकर अनुमोदित मेधा सूची पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समिति के महासचिव शिवचरण मालतो ने आरोप लगाया है कि जारी नामांकन सूची में संथाल समुदाय के छात्रों के नाम शामिल कर दिए गए हैं, जिससे आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के बच्चों का अधिकार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने इसे या तो “मानवीय भूल” या फिर “सोची-समझी साजिश” बताया है। समिति का कहना है कि सरकार द्वारा वर्ष 1954 से संथाल परगना क्षेत्र के 6 आवासीय विद्यालयों—हिरणपुर (पाकुड़), गोपीकांदर व नकटी (दुमका), धमनी (गोड्डा), बंदरकोला व बोरियो (साहेबगंज)—में विशेष रूप से पहाड़िया समुदाय के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा व आवासन की व्यवस्था की गई है। करीब 69 वर्षों से इन विद्यालयों में केवल पहाड़िया छात्र-छात्राएं ही अध्ययन करते आए हैं।
नियमों के उल्लंघन का आरोप।
समिति ने झारखंड सरकार के कल्याण विभाग के 24 दिसंबर 2019 के आदेश (ज्ञापांक-4141) का हवाला देते हुए कहा कि उसमें स्पष्ट प्रावधान है कि कुल सीटों का 25% अति कमजोर जनजाति समूह (PVTG) के लिए आरक्षित रहेगा। यदि ये सीटें खाली रहती हैं, तभी अन्य अनुसूचित जनजाति के छात्रों को प्रवेश दिया जा सकता है। इसके अलावा 85% ग्रामीण और 15% शहरी छात्रों के चयन का नियम भी बताया गया है। समिति का आरोप है कि इन प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
तत्काल रोक और संशोधन की मांग
समिति ने मांग की है कि वर्तमान अनुमोदित मेधा सूची पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और नियमों के अनुरूप संशोधित सूची जारी कर नामांकन प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और पहाड़िया समुदाय के बच्चों का हक सुरक्षित रह सके। इस मामले की प्रतिलिपि आदिवासी कल्याण आयुक्त रांची, आयुक्त संथाल परगना प्रमंडल दुमका, उपायुक्त पाकुड़ और आईटीडीए पाकुड़ को भी भेजी गई है।







