पाकुड़ बिजली कॉलोनी स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान गुरुवार रात माता सती के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। काशी धाम के विख्यात कथावाचक धीरज भाई जी व्याकरण आचार्य ने आवाहित संगीत के साथ शिवपुराण में माता सती के त्याग, शिव के प्रति अटूट प्रेम और सृष्टि संतुलन की मार्मिक कथा का सजीव वर्णन किया। कथावाचन के दौरान बताया गया कि दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया, जिसे सती सहन नहीं कर सकीं। पिता के यज्ञ में शिव के अपमान से आहत होकर माता सती ने यज्ञ कुंड की अग्नि में कूदकर अपने शरीर का त्याग कर दिया। इस घटना से भगवान शिव अत्यंत शोकाकुल हो गए और सती के जले हुए शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करने लगे, जिससे सृष्टि में उथल-पुथल मच गई।
सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। जहां-जहां सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। कथा में आगे बताया गया कि माता सती ने हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया और कठोर तपस्या कर पुनः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। माता सती का यह प्रसंग शिव भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक क्षण रहा। कथा के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भावुक हो उठीं और वातावरण शिव भक्ति से सराबोर हो गया। कथावाचक ने बताया कि शुक्रवार को शिव-पार्वती विवाह उत्सव का भव्य प्रसंग सुनाया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।










