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January 24, 2026 11:14 pm

पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जिला स्तरीय परामर्श, पीड़ित बच्चों को त्वरित न्याय पर जोर

पाकुड़। नालसा, नई दिल्ली एवं झालसा, रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पाकुड़ के तत्वावधान में शनिवार को पाकुड़ व्यवहार न्यायालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में पॉक्सो अधिनियम-2012 एवं किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय जिला स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ दिवाकर पांडे ने की। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे, प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक, अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र, डीएसपी जितेंद्र कुमार, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ सुबोध कुमार दफादार तथा जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण एक्का द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया।

जांच में तेजी और संवेदनशीलता जरूरी, दिवाकर पांडे

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडे ने कहा कि पॉक्सो एवं किशोर न्याय से जुड़े मामलों में जांच प्रक्रिया को त्वरित और संवेदनशील बनाना अत्यंत आवश्यक है। पीड़ित बच्चों को समय पर परामर्श, कानूनी सहायता और संरक्षण मिलना चाहिए, ताकि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शोषण से बचाकर उन्हें सुरक्षित और बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन करने के निर्देश दिए।

पॉक्सो के कानूनी प्रावधानों पर विस्तृत जानकारी

अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद ने पॉक्सो अधिनियम से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों, सुरक्षा उपायों एवं पीड़ितों के अधिकारों पर बिंदुवार जानकारी दी। वहीं पैनल अधिवक्ता सिद्धार्थ शंकर ने हितधारकों की भूमिका, अंतिम मुआवजा एवं अधिनियम के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों पर प्रकाश डाला।

चिकित्सीय जांच और फोरेंसिक साक्ष्य पर जोर

उप मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मनीष कुमार ने धारा-27 के तहत पीड़ित बच्चों की तत्काल चिकित्सा देखभाल, मेडिकल जांच प्रक्रिया तथा फोरेंसिक साक्ष्य की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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जागरूकता से ही अपराध में आएगी कमी

प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक ने कहा कि केवल कानून कठोर होने से अपराध में कमी नहीं आती। समाज में शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण ऐसे अपराध होते हैं। माता-पिता का दायित्व है कि वे बच्चों को जागरूक करें और सुरक्षित वातावरण प्रदान करें।

बेहतर समन्वय से मिलेगा त्वरित न्याय

परामर्श के दौरान बाल सुरक्षा को लेकर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देना और उन्हें संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना है। जिला प्रशासन, पुलिस, चिकित्सक, न्यायपालिका एवं अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पीड़ित बच्चों को त्वरित न्याय और प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों की रही व्यापक मौजूदगी

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ की सचिव रूपा बंदना किरो, अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल मांझी, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सदिश उज्जवल बेक, प्रभारी न्यायाधीश विजय कुमार दास, जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पुनीत, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी बसंती ग्लाडिस वाड़ा, बाल संरक्षण इकाई पदाधिकारी व्यास ठाकुर, सभी थानों के अधिकारी, एनजीओ प्रतिनिधि, पैरा लीगल वॉलिंटियर्स सहित बड़ी संख्या में न्यायिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव रूपा बंदना किरो ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन भी उन्हीं द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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