पंकज मिश्रा की चेतावनी के बाद अमल में आया फैसला, पत्थर लोडिंग बंद
सुविधाएं नहीं तो लोडिंग नहीं, पाकुड़ में पत्थर कारोबारियों का ऐलान
पाकुड़: रेलवे सुविधाओं के अभाव को लेकर पाकुड़ और साहिबगंज जिले के पत्थर व्यवसायियों का आक्रोश लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। पत्थर क्वारी ओनर एसोसिएशन से जुड़े व्यवसायियों ने रेलवे के जरिये पत्थर लोडिंग पूरी तरह ठप कर दी है। इसके चलते पाकुड़ रेलवे स्टेशन के अपर साइडिंग, लोअर साइडिंग, बाहरग्राम और तिलभिट्टा रेलवे साइडिंग में कई रैक खाली खड़े नजर आए.व्यवसायियों का कहना है कि वे वर्षों से रेलवे को करोड़ों रुपये का राजस्व दे रहे हैं, लेकिन बदले में क्षेत्र को बुनियादी रेल सुविधाओं से वंचित रखा गया है। विरोध के इस कदम से रेलवे को प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है, जबकि राज्य सरकार को भी रोजाना करीब 40 लाख रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही लगभग 2000 मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।बताया गया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता पंकज मिश्रा ने हाल ही में पाकुड़ और साहिबगंज के पत्थर व्यवसायियों के साथ बैठक कर रेलवे को स्पष्ट संदेश दिया था कि यदि क्षेत्र में आवश्यक सुविधाएं नहीं दी गईं, तो 16 जनवरी से पत्थर की लोडिंग पूरी तरह रोक दी जाएगी। इसी घोषणा के तहत व्यवसायियों ने रेल के माध्यम से पत्थर ढुलाई बंद कर दी है, जो दूसरे दिन भी जारी रही।व्यवसायियों की प्रमुख मांगों में इस मार्ग से गुजरने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों का पाकुड़ और साहिबगंज रेलवे स्टेशनों पर ठहराव सुनिश्चित करना, पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन सेवा शुरू करना तथा यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। साथ ही कोविड-19 महामारी के दौरान बंद की गई कई ट्रेनों के पुनः परिचालन की भी मांग उठाई गई है।पत्थर व्यवसायी गोपी बत्रा ने बताया कि पाकुड़ से प्रतिदिन 5 से 6 रेलवे रैक पत्थर लोड होकर देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि रेलवे को हम करोड़ों रुपये का राजस्व देते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर क्षेत्र को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। पटना और दिल्ली के लिए सीधी ट्रेनें नहीं हैं और कई लोकल व एक्सप्रेस ट्रेनें भी बंद कर दी गई हैं। गोपी बत्रा ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक रेलवे रैक में पत्थर की लोडिंग नहीं की जाएगी।फिलहाल पत्थर लोडिंग बंद होने से रेलवे, राज्य सरकार और स्थानीय अर्थव्यवस्था तीनों पर इसका असर साफ नजर आने लगा है। अब निगाहें रेलवे प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।









