पाकुड़: डीपीएस स्कूल बस हादसे के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर दर्ज मामले में 70 से 80 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 600 से 700 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसे लेकर इलाके में दहशत का माहौल है।मामले के बाद मृतक के माता-पिता एवं स्थानीय लोगों ने नगर थाना पहुँच पुलिस प्रशासन से निर्दोष लोगों के नाम हटाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे के बाद गुस्से में स्कूल परिसर में तोड़फोड़, नगर थाना के सामने आगजनी और शहर की कई सड़कों को जाम किया गया था, लेकिन इसमें हर कोई दोषी नहीं था।थाने पहुँचे लोगों ने कहा कि एफआईआर में नाम आने और अज्ञात आरोपी बनाए जाने से आम लोग भयभीत हैं। कई लोग घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिनका घटना से सीधा कोई लेना-देना नहीं था, उन्हें भी आरोपी बना दिया गया है।लोगों ने पुलिस को बताया कि वे मृतक के परिवार को न्याय दिलाने और सड़क सुरक्षा की मांग को लेकर सड़क पर उतरे थे। उनका कहना है कि न्याय की मांग को अपराध मानकर मुकदमा दर्ज करना गलत है।ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर निर्दोष लोगों के नाम एफआईआर से हटाए जाएं और वास्तविक दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतक परिवार को न्याय-मुआवजा देने की भी मांग दोहराई गई।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उक्त मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित होना चाहिए था, इसके बावजूद स्कूल बस का संचालन किया जा रहा था। यदि समय रहते प्रशासन द्वारा रोक लगाई जाती, तो यह हादसा टल सकता था।








