पाकुड़। झारखंड में नगर निकाय चुनाव की आहट के साथ ही पाकुड़ नगर परिषद का चुनाव खास चर्चा में है। वजह—इस बार मतदान ईवीएम से नहीं, बल्कि पारंपरिक बैलेट पेपर से होगा। करीब 25 साल बाद मतदाता फिर से मतपत्र पर मुहर लगाकर अपना जनादेश देंगे। ऐसे में युवाओं से लेकर मध्यम आयु वर्ग तक के मतदाताओं के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। अब तक केवल बटन दबाकर वोट देने वाली पीढ़ी के लिए यह प्रक्रिया बिल्कुल अलग है। सही जगह मुहर लगाना, मतपत्र को ठीक से मोड़ना और उसे सुरक्षित तरीके से बॉक्स में डालना—एक छोटी-सी चूक और वोट अमान्य हो सकता है।
एक गलती और वोट होगा खारिज
बैलेट पेपर से मतदान में सावधानी सबसे जरूरी है।
मुहर गलत खाने में लगी
दो प्रत्याशियों के बीच निशान चला गया
या मोड़ते वक्त स्याही दूसरे खाने में फैल गई
तो वोट सीधे रिजेक्ट हो सकता है। यही वजह है कि डिजिटल दौर में पले-बढ़े मतदाताओं के लिए यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक परीक्षा भी बन गया है।
मतदान से पहले ‘रिहर्सल’ की मांग
23 फरवरी को होने वाले मतदान को लेकर शहर के युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से खास पहल की मांग की है। उनका कहना है कि—
हर वार्ड में मॉक डेमो हो, ताकि मतदाता पहले से अभ्यास कर सकें।
प्रशिक्षण शिविर लगाए जाएं, जहां मतपत्र पर सही तरीके से मुहर लगाने और मोड़ने की जानकारी दी जाए।
जागरूकता अभियान चलाकर सोशल मीडिया, पोस्टर और सार्वजनिक अनाउंसमेंट के जरिए पूरी प्रक्रिया समझाई जाए।
प्रशासन की भूमिका निर्णायक
यदि जिला प्रशासन समय रहते जागरूकता अभियान चलाता है, तो मतदान प्रतिशत बढ़ेगा और अमान्य वोटों में भारी कमी आएगी। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब हर मतदाता का वोट सही तरीके से और सही जगह पहुंचे। इस बार पाकुड़ में चुनाव सिर्फ प्रतिनिधि चुनने का नहीं, बल्कि मतदाता जागरूकता की असली परीक्षा भी होगा, जहां डिजिटल पीढ़ी को एक बार फिर कागज और मुहर से लोकतंत्र का सबक सीखना है।






