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January 23, 2026 3:41 pm

वीणावादिनी वर दे !!

बिन सामग्री मैं पूजूं कैसे?
बिन हौसला चलुं मैं कैसे?
बिन स्याही लिख सकूँ न?
बिन पंख मै ऊरु कैसे ?

जीवन मेरी मझधार में अटकी,
तू ही बेड़ा पार लगा दे,
बिन शिक्षा दुखी है जीवन,
शिक्षा का तू अलख जगा दे!

मुझे वीणा वादिनी वर दे!
वर दे! वर दे! वर दे!

बिन अखियों के देख सकूँ न?
आँखों मे तू ज्योति भर दे।
तू है कष्ट निवारिणी माता,
जीवन का सारा कष्ट तू हर ले!

तू है जीवन दायनी माता,
मुझमें हौसला उड़ान तू भर दे,
मेरी कलम स्याही सुखी ?
थोड़ा सा अमृत रस तू भर दे!

तू है वीणावादिनी मैया ,
मुझको तू वर दे !वर दे!

उपेन्द्र प्रसाद यादव
प्रभारी सीआई महेशपुर

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