विधायक हेमलाल मुर्मू ने तीन वर्षों की कार्रवाई का मांगा ब्योरा।
मंत्री योगेन्द्र प्रसाद बोले—ड्रोन सर्वे, बीटीएस-आरएफआईडी और ऑनलाइन चालान से होगी निगरानी मजबूत।
रांची। झारखंड विधानसभा के चालू सत्र में राज्य में अवैध खनन और खनन क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। लिट्टीपाड़ा के विधायक हेमलाल मुर्मू ने सरकार से इस विषय पर विस्तृत जानकारी देने की मांग करते हुए अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े किए। विधायक मुर्मू ने सदन में कहा कि अक्सर देखा जाता है कि मंत्री अधिकारियों द्वारा तैयार किए गए जवाब को ही पढ़ देते हैं, जबकि अवैध खनन जैसे गंभीर विषय पर गहन मंथन और ठोस कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने सरकार से पूछा कि पिछले तीन वर्षों और चालू वर्ष के दौरान अवैध खनन की रोकथाम के लिए गठित जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स ने कितने मामलों में कार्रवाई की है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन के मामलों में अब तक कितनी एफआईआर दर्ज की गई है और संबंधित कानूनों के तहत क्या-क्या कार्रवाई की गई है। इसी क्रम में विधायक मुर्मू ने खनन क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने महालेखाकार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूछा कि वर्ष 2017 की संशोधित नियमावली के तहत खनन क्षेत्रों की निगरानी को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग का क्या प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके प्रश्न के उत्तर में विभाग ने मुख्य मुद्दे से हटकर पर्यावरण स्वीकृति और अन्य औपचारिकताओं का उल्लेख किया, जबकि उनका सवाल तकनीक आधारित निगरानी से जुड़ा था। इस पर जवाब देते हुए मंत्री योगेन्द्र प्रसाद ने कहा कि महालेखाकार ने खनिज क्षेत्रों में नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन सर्वे कराने की अनुशंसा की है, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने बताया कि खनिज संरक्षण एवं विकास नियमावली (एमसीडीआर) 2017 लघु खनिजों पर लागू नहीं होती, क्योंकि यह भारत सरकार द्वारा बनाई गई नियमावली है। मंत्री ने कहा कि राज्य में खनन कार्यों में पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए एमएमडीआर एक्ट 1957 के तहत झारखंड मिनरल रूल्स 2017 और जेएमएमसी 2004 लागू हैं। साथ ही खनिज परिवहन की निगरानी के लिए खनिज लदे वाहनों में बीटीएस और आरएफआईडी सिस्टम लगाने तथा ऑनलाइन चालान व्यवस्था लागू की गई है, जिससे खनन और परिवहन की प्रक्रिया पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।





