पत्रकार अंकित कुमार लाल
डाल्टनगंज के द रिवरफ्रंट एवं अंबेडकर पार्क के आसपास 1 जनवरी नववर्ष के अवसर पर भारी भीड़ देखने को मिली। इस भीड़ में बड़ी संख्या में घर की महिलाएं और बच्चे शामिल थे, जो चावल आधारित भोजन के बजाय मोमोज, गुपचुप, आइसक्रीम और बादाम जैसे फास्ट फूड का आनंद लेते नजर आए। एक रिपोर्ट के अनुसार, जब थे रिवरफ्रंट का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ था, तब इस प्रकार की भीड़ कभी देखने को नहीं मिलती थी। सौंदर्यीकरण के बाद लोगों को बैठने की सुविधा तो मिली है, लेकिन कई स्थानों पर संरचनाएं अब भी क्षतिग्रस्त हालत में दिखाई देती हैं। हालांकि, इस बढ़ती भीड़ का स्थानीय छोटे दुकानदारों को आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। जो दुकानदार पहले प्रतिदिन 200–300 रुपये की कमाई करते थे, वे अब 2 से 3 हजार रुपये प्रतिदिन तक कमा रहे हैं। इससे न केवल उनके घर का खर्च चल रहा है, बल्कि कुछ लोग भविष्य के कठिन समय के लिए पैसे बचाने में भी सक्षम हो पा रहे हैं। दूसरी ओर, सेहत को लेकर चिंता भी बढ़ती जा रही है। पहले डाल्टनगंज को एक सेहतमंद शहर माना जाता था, लेकिन नेपाली मोमोज और अन्य तेलयुक्त फास्ट फूड के बढ़ते चलन से लोगों में मोटापा, शुगर और बीपी जैसी बीमारियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। बार-बार छने हुए तेल में बने खाद्य पदार्थ शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं, जिसका एहसास लोगों को तब होता है जब उन्हें लंबे समय तक अस्पताल और डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज पर खर्च करने से बेहतर है कि लोग वर्तमान में ही अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत हों। पर्यावरण की स्थिति भी चिंता का विषय बनती जा रही है। पहले डाल्टनगंज में प्रदूषण का स्तर बहुत कम हुआ करता था। हाल ही में एक कवयित्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बचपन और युवावस्था में यहां का वातावरण बेहद स्वच्छ था, लेकिन आज यहां भी दिल्ली जैसी प्रदूषित हवा महसूस होती है। वे दिल्ली से यह सोचकर आई थीं कि डाल्टनगंज में शुद्ध वायु मिलेगी, पर वास्तविकता देखकर वे हैरान रह गईं।
इसके अलावा, शहर के नौजवानों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति भी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। सिगरेट, शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन में लिप्त कुछ युवा न केवल अपने भविष्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि शहर की छवि को भी धूमिल कर रहे हैं। कई बार ऐसे लोग पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर भी देखे जाते हैं, जिससे समाज में नकारात्मक संदेश जाता है। कुल मिलाकर, नववर्ष की खुशियों के बीच थे रिवरफ्रंट और अंबेडकर पार्क की भीड़ जहां एक ओर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर सेहत, पर्यावरण और सामाजिक मूल्यों को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है।







