पाकुड़/ रविवार सुबह करीब 11 बजे जब एक टोटो में सफर किया, तो नजर एक ऐसे बोर्ड पर पड़ी जिसने सोचने पर मजबूर कर दिया। टोटो चालक के कपड़े फटे हुए थे, हालात साधारण नहीं थे, लेकिन टोटो में लगा एक छोटा-सा बोर्ड बहुत कुछ कह गया। पाकुड़ सदर प्रखंड मदर टेरेसा चौक की ओर आते समय दिखा यह बोर्ड किसी प्रचार का हिस्सा नहीं था, न ही किसी नियम की मजबूरी—यह था एक आम इंसान का असाधारण संदेश। सीमित साधनों और संघर्ष भरे जीवन के बावजूद टोटो चालक ने अपने व्यवहार और सोच से यह साबित कर दिया कि आज भी समाज में मानवता सांस ले रही है। जहां आज के दौर में लोग सुविधाओं और स्वार्थ में उलझे नजर आते हैं, वहीं यह टोटो चालक बिना कहे समाज को सीख दे गया। फटे कपड़े गरीबी का संकेत हो सकते हैं, लेकिन उसकी सोच अमीर थी। यह दृश्य हमें यह याद दिलाने के लिए काफी है कि इंसान की पहचान उसके कपड़ों से नहीं, उसके विचारों और कर्मों से होती है। यह टोटो और उस पर लगा बोर्ड सिर्फ एक सवारी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक संदेश था— इंसानियत अभी जिंदा है।










