पाकुड़ में किसानों को वैज्ञानिक और सही कृषि सलाह देने की दिशा में एक अहम पहल की गई है। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा) के तत्वावधान में इनपुट डीलरों के लिए कृषि प्रसार सेवा में डिप्लोमा पाठ्यक्रम का शुभारंभ संयुक्त कृषि भवन, पाकुड़ स्थित आत्मा सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी सह परियोजना निदेशक, आत्मा, पाकुड़ मृत्युंजय कुमार और कृषि विज्ञान केंद्र की वरीय वैज्ञानिक किरण कंडिर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने कहा कि तकनीकी रूप से दक्ष इनपुट डीलर ही किसानों के सशक्त सलाहकार बन सकते हैं। सही तकनीकी जानकारी के अभाव में किसान अक्सर अधिक लागत और कम उत्पादन की समस्या से जूझते हैं। यह प्रशिक्षण डीलरों को वैज्ञानिक सोच से लैस करेगा, ताकि वे किसानों को फसल उत्पादन, बीज, उर्वरक और कीटनाशी से जुड़ी समस्याओं का सही समाधान दे सकें। उन्होंने बताया कि यह डिप्लोमा पाठ्यक्रम 40 दिनों में दो सत्रों के माध्यम से कुल 80 कक्षाओं में संचालित होगा। इसके साथ ही 8 दिनों का प्रायोगिक प्रक्षेत्र भ्रमण भी कराया जाएगा, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव मिल सके। यह पाठ्यक्रम भारत सरकार के प्रबंधन संस्थान हैदराबाद, समेति झारखंड (रांची) और आत्मा पाकुड़ के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र की वरीय वैज्ञानिक किरण कंडिर ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम वैज्ञानिकों और किसानों के बीच की दूरी को कम करते हैं। जहां वैज्ञानिक सीधे नहीं पहुंच पाते, वहां प्रशिक्षित इनपुट डीलर वैज्ञानिक तकनीक किसानों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। कार्यक्रम में आत्मा पाकुड़ के उप परियोजना निदेशक चंद्रमौली, लेखापाल संजय कुमार चौधरी सहित जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए 40 इनपुट डीलर मौजूद रहे।









