पलामू:चैनपुर अंचल कार्यालय एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस जमीन के रिकॉर्ड में करीब 75 वर्षों से नाम दर्ज था, उसी रजिस्टर-2 से सीता साहू का नाम हटाए जाने की कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बिना स्पष्ट नोटिस और सुनवाई के किसी व्यक्ति का नाम हटाने की जल्दबाजी क्यों की गई? क्या यह केवल प्रशासनिक गलती है या फिर इसके पीछे किसी राजनीतिक दबाव की परछाई काम कर रही है?
परिवार का कहना है कि यह मामला पहले हाई कोर्ट के आदेश से जुड़ा बताया गया, जबकि अब यह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है तो क्या अंचल कार्यालय को इतनी जल्दबाजी दिखानी चाहिए थी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में भी अगर ऑनलाइन रिकॉर्ड के आधार पर बिना गहन जांच के नाम हटाया जा सकता है, तो फिर आम लोगों की पैतृक जमीन कितनी सुरक्षित है?
अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंचल कार्यालय गलती सुधार कर सीता साहू का नाम फिर से बहाल करेगा, या फिर अपने फैसले को सही ठहराने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया का रास्ता चुनेगा।
मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या चैनपुर अंचल कार्यालय पर किसी प्रभावशाली ताकत का दबाव है, या फिर यह प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी चूक है?





