जनता अपना सुझाव उपयुक्त कार्यालय या जिला खनन कार्यालय में पत्र के माध्यम से या ई- मेल के माध्यम दे सकते हैं।
सतनाम सिंह
रांची : झारखंड सरकार ने कोल बेयरिंग एरियाज (अधिग्रहण और विकास) संशोधन बिल 2024 के मसौदे पर आम जनता से सुझाव प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य के खनन और भूविज्ञान विभाग के सचिव जितेन्द्र कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी जिला खनन पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस बिल पर जनता से सुझाव प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं और उन सुझावों को समय रहते खान निदेशालय तक भेजें। यह प्रक्रिया 15 दिनों तक चलेगी, जिसके बाद राज्य सरकार केंद्रीय खान मंत्रालय को एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस निर्णय के तहत, झारखंड सरकार को केंद्रीय खान मंत्रालय से 28 नवंबर 2024 को प्राप्त पत्र के माध्यम से यह निर्देश प्राप्त हुआ था कि वे कोल बेयरिंग एरियाज (अधिग्रहण और विकास) संशोधन बिल 2024 के मसौदे पर जनता से सुझाव प्राप्त करें और उन्हें केंद्रीय मंत्रालय तक भेजें। केंद्रीय मंत्रालय ने राज्यों से यह अनुरोध किया है कि वे राज्यों के संबंधित विभागों और आम जनता से सुझाव और टिप्पणियाँ प्राप्त करें, जिससे इस बिल को और अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाया जा सके।
बिल के प्रमुख उद्देश्य और संशोधन
इस बिल के मसौदे में किए गए प्रमुख संशोधनों पर चर्चा करते हुए, राज्य सरकार ने सभी जिला खनन अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वे जनता से टिप्पणियाँ और सुझाव प्राप्त करें। इसके लिए संबंधित उपायुक्त के माध्यम से सुझावों को खान निदेशालय को समय रहते भेजने की व्यवस्था की गई है। इस प्रक्रिया के दौरान, जनता को यह भी सूचित किया जाएगा कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने विचार और चिंताओं को प्रस्तुत कर सकें। इस बिल का उद्देश्य कोल बेयरिंग क्षेत्रों में खनन गतिविधियों के नियमन से संबंधित है। इस बिल में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य खनन के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाना, खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित करना है। इसके अतिरिक्त, इस बिल में खनन पट्टों के आवंटन की प्रक्रिया में बदलाव, भूमि अधिग्रहण के लिए केंद्रीय सरकार को अधिक शक्तियाँ देने और पुनर्वास की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने का प्रस्ताव भी किया गया है। इसके अलावा, इस बिल में कोल इंडिया लिमिटेड और अन्य सरकारी कंपनियों को खनन पट्टों के अधिक नियंत्रण और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से जिम्मेदार बनाने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं। यह बिल खनन कंपनियों को उनकी खनन परियोजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण के उपायों को सख्ती से लागू करने और स्थानीय समुदायों के पुनर्वास में सहयोग करने का निर्देश देता है।
जनता के लिए सुझाव देने की प्रक्रिया:
राज्य सरकार ने सार्वजनिक परामर्श को लेकर विशेष ध्यान दिया है, ताकि सभी प्रभावित पक्षों की आवाज़ सुनी जा सके। इसके लिए प्रत्येक जिले में खनन पदाधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे स्थानीय जनता, आदिवासी समुदाय, और अन्य प्रभावित लोगों से सुझाव प्राप्त करें। इन सुझावों को जिला उपायुक्तों के माध्यम से खान निदेशालय भेजने का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान, जनता को यह भी सूचित किया जाएगा कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपने विचार और चिंताओं को प्रस्तुत कर सकें।
झारखंड सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुआवजा और पुनर्वास प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए इस बिल में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। भूमि अधिग्रहण के लिए उचित मुआवजा देने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए एक समग्र योजना तैयार की जाएगी।
मुख्य विशेषताएँ और बदलाव:
- भूमि अधिग्रहण के लिए केंद्रीय सरकार की शक्तियों में वृद्धि: केंद्रीय सरकार को अधिक अधिकार प्रदान किए गए हैं, ताकि खनन गतिविधियों के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा सके। भूमि अधिग्रहण से जुड़े विवादों को हल करने में केंद्रीय मंत्रालय का हस्तक्षेप बढ़ा दिया गया है, जिससे सभी प्रक्रियाएं और अधिक समयबद्ध हो सकें।
- मुआवजा और पुनर्वास में सुधार: प्रभावित व्यक्तियों को उचित मुआवजा देने और उनका पुनर्वास करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। भूमि अधिग्रहण के तहत प्रभावित होने वाले व्यक्तियों को पहले से कहीं ज्यादा बेहतर मुआवजा और पुनर्वास का अधिकार दिया जाएगा। यह मुआवजा मौजूदा बाजार दरों पर आधारित होगा और प्रभावित लोगों को उनके वैध अधिकार के रूप में मिलेगा।
- खनन कंपनियों के लिए नए पर्यावरणीय और सामाजिक प्रावधान: खनन कंपनियों को उनके कार्यों के पर्यावरणीय प्रभावों और सामाजिक दायित्वों के प्रति और अधिक जिम्मेदार बनाने का प्रस्ताव किया गया है। कंपनियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि वे पर्यावरणीय नियमों का पालन करें, साथ ही आसपास के समुदायों के प्रति अपने सामाजिक दायित्वों को निभाएं।
- प्रभावित जनसमूह की भागीदारी: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रभावित समुदायों को इस प्रक्रिया में पूरी तरह से शामिल किया जाए और उनकी राय को ध्यान में रखा जाए। इससे स्थानीय लोगों की चिंता और अपेक्षाएँ सीधे तौर पर सरकार तक पहुंचेंगी, जिससे विकास प्रक्रिया को और अधिक समावेशी बनाया जा सकेगा।
- आधिकारिक कार्यवाही की पारदर्शिता: खनन पट्टों के आवंटन और अन्य संबंधित गतिविधियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नए नियम बनाए गए हैं। अब से खनन पट्टे आवंटित करने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पक्षपाती निर्णयों को रोका जाएगा, ताकि हर कदम पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।
- खनन क्षेत्र में अधिक नवाचार: इस बिल के माध्यम से खनन क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि खनन गतिविधियाँ अधिक कुशल और पर्यावरण के अनुकूल हो सकें। यह प्रयास सरकार का है कि खनन से जुड़े सभी कार्यों में सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।
जनता की भागीदारी और सुझाव देने का महत्व:
झारखंड सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कोल बेयरिंग एरियाज (अधिग्रहण और विकास) संशोधन बिल 2024 पर जनता की राय ली जाए। सरकार ने आम जनता से आग्रह किया है कि वे अपने सुझाव ईमेल के माध्यम से भेजें। इसके लिए विशेष ईमेल पते dk.sctankl@nic.in और prlw.moc@nic.in दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से प्राप्त सुझावों के माध्यम से खनन क्षेत्र में नवीनतम और प्रभावी सुधार लाए जा सकते हैं, जो न केवल राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण होंगे, बल्कि स्थानीय समुदायों और पर्यावरणीय संरक्षण के लिए भी लाभकारी सिद्ध होंगे। इस प्रक्रिया से न केवल खनन क्षेत्र की नियामक संरचना को मजबूत किया जाएगा, बल्कि इसके साथ-साथ राज्य में खनन गतिविधियों से प्रभावित सभी समुदायों के हितों की भी रक्षा की जाएगी।





