सुधीर सिन्हा
गिरिडीह। जिले के जमुआ प्रखंड के शिवसिंहडीह निवासी मो बसीर उद्दीन अंसारी के पुत्र मो शाहिद अंसारी बना डॉक्टर। जमुआ के मो शाहिद अंसारी ने एमबीबीएस डॉक्टर बनकर जमुआ का नाम रोशन किया है। उन्होंने विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद भारत की कठिन फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) सफलतापूर्वक पास की है। डॉ. मो शाहिद अंसारी ने किर्गिस्तान के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मेडिसिन कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। भारत में चिकित्सा अभ्यास के लिए एफएमजीई परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। यह परीक्षा अपनी उच्च कठिनाई दर के लिए जानी जाती है, जिसमें देश-विदेश से हजारों छात्र भाग लेते हैं, लेकिन सफलता दर कम रहती है। डॉ. मो शाहिद अंसारी के पिता मो बसीर उद्दीन अंसारी जमुआ में डॉ साहब के नाम से विख्यात हैं। बता दें मो बसीर उद्दीन अंसारी का शुरू से सपना था कि उनका पुत्र डॉक्टर बने और भविष्य में अपने क्षेत्र में बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर समाज की सेवा करें। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपने बेटे की शिक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ी। आखिरकार पुत्र ने भी कड़ी मेहनत की और अपने पिता के सपने को पूरा किया। शाहिद की इस सफलता से परिवार और जमुआ में खुशी का माहौल है। डॉ. मो शाहिद अंसारी की उपलब्धि ने जमुआ के युवाओं को प्रेरित किया है। डॉ मो शाहिद अंसारी ने मैट्रिक की पढ़ाई इंदिरा गांधी उच्च विद्यालय जमुआ से किया और इंटर साइंस की पढ़ाई जगदीश प्रसाद कुशवाहा कॉलेज ऑफ कम्पीटेन्स भंडारो से किया। उसके बाद कोटा से तैयारी किया और नीट क्वालीफाई किया। फिर, उसके बाद वह विदेश गए और किर्गिस्तान के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मेडिसिन कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने ने विदेश में रहकर पांच साल तक कड़ी मेहनत से पढ़ाई किया और हाल ही में वह भारत वापस लौटे, दिल्ली में रहकर एफएमजीई परीक्षा की तैयारी शुरू की और फर्स्ट अटेम्प्ट में ही भारत की कठिन फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) सफलतापूर्वक पास की है। डॉ मो शाहिद अंसारी ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता, शिक्षकों, दोस्तों सहित परिवार के सभी सदस्यों और पूरे समाज को दिया। उन्होंने बताया कि परिवार के नैतिक सहयोग और आशीर्वाद के बिना यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था। उन्होंने यह भी बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार ने हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया। डॉ मो शाहिद अंसारी ने कहा कि मेरे पिता ने हमेशा से मेरा साथ दिया हैं, मेरे पिता ने हमेशा गरीबों की सेवा की है, और मैं भी अब गरीबों की सेवा करूंगा। उन्होंने ने कहा कि मेरे पिता ने ही हमें सिखाया है कि कैसे गरीबों के काम आना है। उन्होंने ने कहा कि डॉक्टरी मेरा पेशा नहीं सेवा बनेगा। डॉ मो शाहिद अंसारी ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ बनाना और जरूरतमंद लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने जीवन में बहुत मेहनत की, लगन से पढ़ाई की और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी परिश्रम किया तब जाकर यह सफलता हासिल हुई। जमुआ के गणमान्य व्यक्तियों और शुभचिंतकों ने डॉ. मो शाहिद को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बधाई देने वालों में कमरुद्दीन अंसारी, शशि कुमार, फैयाज अंसारी, शहजाद अंसारी, शुभम सिन्हा, रोशन कुमार, मनीष कुमार, अंकित कुमार, रोशन, प्रवेश, गौतम, विकास आदि कई लोगों ने बधाई दिया।








