पाकुड़ में शनिवार को बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई को लेकर ‘आशा’ इकाई के सदस्यों के लिए एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण नालसा (राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव रूपा बंदना किरो ने की। उन्होंने बताया कि नालसा द्वारा गठित ‘आशा’ (Awareness, Support, Help and Action) यूनिट का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना और कानूनी स्तर पर ठोस कार्रवाई को सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम में बाल विवाह से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर विस्तार से चर्चा हुई। सचिव ने बताया कि आशा इकाई गांव-गांव शिविर लगाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणाम और कानूनी सजा के बारे में बताएगी। साथ ही स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच विधिक जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। “नारी की उड़ान: बंदिशों से आज़ादी तक” विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा “अब वक्त है कि महिलाएं अपनी शर्तों पर जिंदगी जिएं। शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के हर अवसर पर नारी को बराबरी का हक मिले।”
बाल विवाह पर एकजुट हुईं प्रशासनिक इकाइयां
इस मौके पर डीएसपी जितेंद्र कुमार, एसडीपीओ डी एन आज़ाद, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के प्रमुख सुबोध कुमार दफादर, पैनल अधिवक्ता समीर मिश्रा, बाल संरक्षण पदाधिकारी व्यास ठाकुर, मुख्य जिला चिकित्सक अधिकारी डॉ. मनीष कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, आंगनवाड़ी सेविकाएं, पैरा लीगल वॉलिंटियर समेत ‘आशा’ इकाई के सभी सदस्य मौजूद रहे। कार्यशाला के दौरान कानूनी सेवा, पुनर्वास और सामुदायिक सहयोग के जरिए बाल विवाह को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया।








