सरकारी सहयोग और मेहनत से बदली तकदीर, आज बन चुकी हैं सशक्त महिला की प्रेरक मिसाल
बकरी पालन, स्ट्रॉबेरी व मशरूम से अब हर महीने 8 हजार तक कमाई।
पाकुड़। महेशपुर प्रखंड के साहेबनगर गांव की फूलमणि मुर्मू ने संघर्ष भरी जिंदगी से निकलकर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई है। कभी मजबूरी में हड़िया बेचकर परिवार चलाने वाली फूलमणि आज सम्मानजनक आजीविका के साथ समाज में मिसाल बन चुकी हैं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार में पति की अनियमित मजदूरी के कारण वर्ष 2021 में उन्होंने हड़िया बेचने का काम शुरू किया था। इससे रोजाना 250–300 रुपये की आमदनी तो होती थी, लेकिन सामाजिक अपमान और असुरक्षित माहौल ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रखा था।

2024 में बदली जिंदगी की दिशा।
वर्ष 2024 में “फूलो झानो आशीर्वाद अभियान” से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी और The/Nudge Institute के सहयोग से उन्हें 25 हजार रुपये की सहायता राशि मिली, जिसने उनके लिए अवसरों के नए दरवाजे खोल दिए।
छोटे प्रयास से बड़ा बदलाव
मिली राशि से उन्होंने 3 बकरियां और 1 सुअर खरीदा। मेहनत और लगन के दम पर आज उनके पास 6 बकरियां और 3 सुअर हो चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की और अब तक 14 किलो उत्पादन कर बाजार में बेच चुकी हैं। मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने इसे भी अपनी आय का हिस्सा बना लिया है।
अब हर महीने 7–8 हजार की आमदनी
विभिन्न आजीविका गतिविधियों से।
फूलमणि अब हर महीने 7 से 8 हजार रुपये तक कमा रही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अब वे सम्मान के साथ जीवन जी रही हैं और समाज में एक सशक्त महिला के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

मार्गदर्शन से मिली मजबूती।
इस बदलाव में नव जीवन सखी सोनाली मुर्मू की अहम भूमिका रही, जिन्होंने उन्हें प्रशिक्षण, बीमा और आजीविका के लिए लगातार मार्गदर्शन दिया।
फूलमणि बोलीं— जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़।
फूलमणि मुर्मू कहती हैं कि इस योजना से जुड़ना उनके जीवन का सबसे बड़ा बदलाव है। अब वे आत्मनिर्भर हैं और सम्मान के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। उन्होंने सरकार और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार जताया।





